तत्कालीन प्रमुख सचिव ने कराई थी मामले की जांच
आरोप है कि अधीक्षण अभियंता और अधिशासी अभियंता के डिजिटल हस्ताक्षर वाले डोंगल को लगाकर चहेते ठेकेदारों के रेट में बदलाव किया गया। इससे कई टेंडर 21 से 20-19 प्रतिशत कम रेट पर आ गए। साथ ही आचार संहिता के दौरान ही टेंडर खोल भी दिए गए। एसई और एक्सईएन के डोंगल से कंप्यूटर में छेड़छाड़ कर टेंडर रेट बदलने की शिकायत मिलने के बाद इसकी शिकायत तत्कालीन प्रमुख सचिव नितिन रमेश गोकर्ण से की गई थी।
इसके बाद 23 टेंडर निरस्त कर दिए गए थे। प्रमुख सचिव के निर्देश पर इस मामले की इंडो-नेपाल बार्डर के मुख्य अभियंता की अध्यक्षता में गठित तीन सदस्यीय उच्चस्तरीय कमेटी जांच कर रही है। इस बीच गड़बड़ी की आशंका पर 108 टेंडर फिर निरस्त कर दिए गए हैं। अब ये टेंडर नए सिरे से कराए जाएंगे।
कंप्यूटर में छेड़छाड़ कर रेट बदलने की शिकायत पर 23 टेंडर पहले निरस्त किए गए थे। इसके बाद सभी टेंडर निरस्त कर दिए गए हैं। ताकि पारदर्शी प्रक्रिया अपनाई जा सके। ये टेंडर फिर से कराए जा रहे हैं। -एके द्विवेदी, अधीक्षण अभियंता।