कोरोना संक्रमण काल में पैरोल पर रिहा किए गए एक कैदी के लिए जेल से बाहर जाना फायदेमंद साबित हो गया। पैरोल अवधि में उसने अपनी शादी तय कर ली, लेकिन सात फेरे लेने से पहले उसकी जेल वापसी का आदेश आ गया। जिससे परेशान सजायाफ्ता बंदी ने दो दिन पहले खुद को जेल में सरेंडर किया और शुक्रवार को अपने जुर्माने के सात हजार रुपये जमाकर अपने घर चला गया। 11 दिसंबर को उसकी शादी है।
जेल से सूचना के दौरान पता चला कि रेलवे एक्ट के छह मुकदमों में एक-एक साल की सजा पाए बंदी रोशन पाल निवासी सासाराम, बिहार जब पैरोल पर रिहा होकर अपने घर गया तो वहां उसके शादी की चर्चा छिड़ गई। अक्तूबर में उसकी शादी भी तय हो गई। नवंबर में सगाई के बाद 11 दिसंबर को शादी की तारीख पक्की हो गई।
इसी बीच 21 नवंबर को नैनी सेंट्रल जेल से उसे फोन करके जेल में हाजिर होने को कहा गया तो रोशन पाल और उसके घरवालों में मायूसी छा गई। उसने जेल प्रशासन से बहुत अनुनय विनय किया, लेकिन जेल प्रशासन ने शासन के आदेश का हवाला देकर उसे तत्काल हाजिर होने को कहा। जब वह नहीं आया तो संबंधित थाने से पुलिस उसके घर पहुंच गई। जिसके बाद तीन दिन पहले रोशन पाल नैनी सेंट्रल जेल में खुद को सरेंडर किया।
जेल प्रशासन ने पड़ताल की तो पता चला कि उसकी सजा तो पूरी हो चुकी है। सिर्फ जुर्माना सात हजार रुपए किया गया है, जिसे अगर वह अदा कर दे तो रिहा हो सकता है। नहीं तो एक महीने और जेल में जुर्माने की रकम अदा करने की सजा काटनी पड़ेगी। रोशनलाल ने फोन के जरिए परिवार से संपर्क किया और चार दिसंबर को जुर्माने के सात हजार रुपये जमा करके जेल से रिहा हो गया। उसकी 11 दिसंबर को शादी है। वरिष्ठ जेल अधीक्षक पीएन पांडेय ने बताया कि जुर्माने की रकम जमा करने पर एक कैदी की रिहाई हुई है।