सरकार की बार-बार चेतावनी के बाद भी प्रदेश के संयुक्त शिक्षा निदेशक एवं जिला विद्यालय निरीक्षक माध्यमिक विद्यालयों में खाली शिक्षकों के पदों की जानकारी नहीं जुटा पा रहे हैं। पदों का विवरण सही समय से चयन बोर्ड नहीं पहुंचने के कारण बार-बार घोषणा के बाद भी टीजीटी-पीजीटी एवं प्रधानाचार्य के पदों की घोषणा नहीं हो पा रही है। चयन बोर्ड के अधिकारी हर बैठक में शिक्षक भर्ती के पदों की घोषणा के लिए नए-नए दावे कर रहे हैं।
प्रदेश के माध्यमिक विद्यालयों के प्रबंधक एवं प्रधानाचार्य अपने विद्यालयों में खाली शिक्षकों के पदों का विवरण जिला विद्यालय निरीक्षक को नहीं भेज रहे हैं। प्रबंधकों में कई बड़े राजनेता एवं अधिकारियों के शामिल होने के कारण शिक्षाधिकारी उन पर कार्रवाई की हिम्मत नहीं कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड की ओर से प्रदेश के सभी जिला विद्यालय निरीक्षकों, संयुक्त शिक्षा निदेशकों से उनके जिले एवं मंडल में खाली शिक्षकों के पदों का विवरण मांगा जा रहा है। जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय तक प्रबंधक अपने विद्यालय में खाली पदों का विवरण नहीं भेजते हैं।
शिकायत मिली है कि प्रबंधक खाली पदों पर मनमाने तरीके नियुक्ति करके संबंधित शिक्षक से कोर्ट में याचिका दाखिल करवाकर पिछले दरवाजे से अपने लोगों को शिक्षक बनाने की कोशिश करते हैं। इस प्रकार की शिकायत प्रदेश भर में मिल रही है। कुछ प्रबंधक तो चयन बोर्ड को खाली पदों का विवरण भेजने के बाद भी एलटी ग्रेड शिक्षकों को प्रमोशन देकर प्रवक्ता बना दिया। इससे बाद में चयन बोर्ड से चयनित होकर पहुंचे शिक्षकों को परेशानी हुई। यही कारण है कि इस समय चयन बोर्ड से चयनित सात सौ शिक्षक समायोजन का इंतजार कर रहे हैं। पदों का विवरण नहीं मिलने के कारण ही चयन बोर्ड की ओर से टीजीटी-पीजीटी एवं प्रधानाचार्य के खाली पदों पर भर्ती की घोषणा नहीं हो पा रही है।