सीएम का स्पष्ट निर्देश है कि किसी भी हाल में दागी छवि वाले पुलिसकर्मियों को फील्ड में तैनाती न दी जाए। उन्होंने हाल ही में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में भी इस संबंध में निर्देश दिए थे। गवाह को फर्जी तरीके से जेल भेजने के आरोप बेहद गंभीर हैं। प्रथम दृष्टया भूमिका संदिग्ध होने पर तीनों पुलिसकर्मियों को जोनल दंगा नियंत्रण इकाई में संबद्ध किया गया है। मामले की जांच एडिशनल एसपी से कराई जा रही है। डीआईजी को निर्देशित किया गया है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाए। -प्रेमप्रकाश, एडीजी प्रयागराज जोन
सर्विलांस से लोकेशन निकालकर पकड़ा था गवाह को सूत्रों का कहना है कि सर्विलंास प्रभारी संजय सिंह यादव ने अपने पद का फायदा उठाते हुए इस मामले में खेल किया। उसने हंडिया इंस्पेक्टर और नारकोटिक्स प्रभारी को भी शामिल कर लिया। इसके बाद खुद गवाह की लोकेशन सर्विलांस के जरिए निकालकर उसे शहर से पकड़वाया और फिर हंडिया इंस्पेक्टर को सौंप दिया। जिसके बाद हंडिया थाने में दाखिला कराकर उसे जेल भेज दिया गया।
स्कूटी पर लगा दिया ट्रक का नंबर
इस मामले में एक और खेल किया गया। गवाह को जिस स्कूटी के साथ पकड़ा गया, उसकी नंबर प्लेट भी बदल दी गई। सूत्रों का कहना है कि गवाह को शहरी क्षेत्र से पकड़ा गया, जिसके कब्जे से स्कूटी भी मिली। इस स्कूटी को पहले कर्नलगंज थाने ले जाया गया। वहां से इसे हंडिया थाने भेजा गया और बीच रास्ते में ही स्कूटी की ओरिजिनल नंबर प्लेट बदलकर इस पर ट्रक की नंबरप्लेट लगा दी गई। ऐसा इसलिए किया गया ताकि गवाह को जालसाजी का भी आरोपी बनाया जा सके।