फूलपुर संसदीय सीट से भाजपा प्रत्याशी केशरी देवी पटेल और इलाहाबाद संसदीय सीट से डा. रीता बहुगुणा जोशी ने अपने नामांकन के दौरान प्रस्तावकों में सोशल इंजीनियरिंग का फार्मूला अपनाया है। इन दोनों ही प्रत्याशियों ने अपने जो प्रस्तावक बनाए जाने हैं उसमें अगड़ी, पिछड़ी एवं अनुसूचित जाति का कॉकटेल है। खास बात ये कि उनके सभी प्रस्तावक जिले के चार-चार विधायक ही होने जा रहे हैं। गुड फ्राइडे का अवकाश होने के चलते केशरी देवी का नामांकन अब 19 की बजाय 20 अप्रैल को होगा, जबकि रीता जोशी 22 अप्रैल को ही अपना नामांकन करेंगी।
केशरी देवी का नामांकन जुलूस 20 अप्रैल को चंद्रशेखर आजाद पार्क से शुरू होगा। कलक्ट्रेट स्थित नामांकन स्थल पर उनके प्रस्तावक कौन होंगे यह नाम तय हो गया है। इसमें सूबे के कैबिनेट मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह, शहर उत्तरी विधायक हर्षवर्धन बाजपेयी, सोरांव सुरक्षित सीट से अपना दल विधायक जमुना प्रसाद सरोज और फाफामऊ के विधायक विक्रमाजीत मौर्य शामिल है। सिद्धार्थ और हर्ष बाजपेयी जहां अगड़ी जाति के हैं तो वहीं जमुना प्रसाद सरोज अनुसूचित और विक्रमाजीत मौर्य पिछड़ी जाति से हैं।
इसी तरह रीता जोशी के प्रस्तावकों में सूबे के कैबिनेट मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी, बारा विधायक डा. अजय भारती, कोरावं विधायक राजमणि कोल एवं मेजा की विधायक नीलम करवरिया रहेंगी। ये चारों विधायकों में भी अगड़ी, पिछड़ी एवं अनुसूचित जाति का समीकरण है। इस तरह से डा. रीता बहुगुणा जोशी और केशरी देवी ने प्रस्तावकों में ही जातीय समीकरण की कॉकटेल दिख रही है। पूर्व विधायक दीपक पटेल और भाजपा नेता अभिषेक शुक्ला ने बताया कि चारों प्रस्तावकों के नाम की मुहर लग गई है।