धरने की अगुवाई कर रहे पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष विनोद चंद दुबे ने कहा कि 1942 में भी छात्रों पर इस तरीके का जुल्म नहीं हुआ था, जब देश गुलाम था। वहीं, पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष सतीश अग्रवाल ने छात्रसंघ बहाली की मांग करते हुए कहा कि यह लोकतंत्र की नर्सरी है।
छात्रसंघ बहाली की मांग को लेकर संयुक्त संघर्ष समिति के बैनर तले इलाहाबाद विश्वविद्यालय में जारी आंदोलन के 558वें दिन छात्रसंघ के पूर्व पदाधिकारियों ने भी अपनी उपस्थित दर्ज कराई। महात्मा गांधी की पुण्य तिथि पर पूर्व पदाधिकारियों ने रेलवे भर्ती के छात्रों पर हुए लाठीचार्ज के विरोध में शहीद लाल पद्मधर की प्रतिमा के सामने मौन धरना दिया और इसके बाद बैठक कर घटना की निंदा की।
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धरने की अगुवाई कर रहे पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष विनोद चंद दुबे ने कहा कि 1942 में भी छात्रों पर इस तरीके का जुल्म नहीं हुआ था, जब देश गुलाम था। वहीं, पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष सतीश अग्रवाल ने छात्रसंघ बहाली की मांग करते हुए कहा कि यह लोकतंत्र की नर्सरी है। पूर्व अध्यक्ष अनुग्रह नारायण सिंह ने कहा कि रेलवे भर्ती के परीक्षार्थियों पर हुआ बर्बरता पूर्वक हमला लोकतंत्र के लिए घातक है। सरकार रेलवे में कोई भर्ती नहीं कराना चाहती।
पूर्व अध्यक्ष केके राय ने कहा कि छात्रों पर हुए बर्बर लाठीचार्ज के लिए जिले के कप्तान जिम्मेदार हैं। सही मायने में जिले के कप्तान को ही बर्खास्त किया जाना चाहिए। पूर्व अध्यक्ष संजय तिवारी ने भी कप्तान को बर्खास्त करने की मांग की। छात्रसंघ के पूर्व उपाध्यक्ष रघुनाथ द्विवेदी ने कहा छात्रों पर बर्बरता पूर्वक लाठीचार्ज करना लोकतंत्र और संविधान के खिलाफ है।
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इस मौके पर समाजवादी छात्रसभा के जिलाध्यक्ष अखिलेश गुप्ता, अविनाश कुमार वर्मा, विश्वेश राज रत्नम, चौधरी संदीप, आशुतोष गुड्डू, अरविंद सरोज, शादाब जिया, डॉ. रजवंत सिंह, डॉ. दिनेश सिंह, सुनील यादव, अजेंद्र गौड़, तनवीर मिश्र, रविंद्र सिंह, शादाब अहमद, सुरेश त्रिपाठी, अभिषेक शुक्ला आदि मौजूद रहे।।