हालांकि, आंकड़े इसके उलट हैं। दिसंबर 2022 से अब तक पूरे जनपद में गैंगस्टर के महज छह मामले दर्ज हो सके हैं। यह मामले खुल्दाबाद, सिविल लाइंस, करेली, नैनी, खीरी, थरवई में लिखे गए। बड़ी बात यह है कि यमुनानगर व गंगानगर जोन में महज एक-एक गिरोह पर कार्रवाई हुई। जबकि, कमिश्नरेट लागू होने से पहले गैंग बनाकर अपराध करने वालों पर कार्रवाई के आंकड़े कहीं ज्यादा हैं। एक दिसंबर 2020 से एक दिसंबर 2022 तक कुल 168 गैंगस्टर के मुकदमे दर्ज किए गए। इनमें से सबसे ज्यादा खुल्दाबाद व झूंसी में 10-10 जबकि, धूमनगंज में नौ मुकदमे दर्ज हुए थे।
कौन-कौन से प्रमुख मामलों में कार्रवाई लंबित
गैंगस्टर के नए मामले दर्ज करने में तो कोताही बरती ही जा रही है, पूर्व में दर्ज मुकदमों में भी आरोपियों की अपराध से अर्जित संपत्ति कुर्क करने में भी लापरवाही की जा रही है। इनमें माफिया के करीबी से लेकर गोतस्कर तक शामिल हैं।
नैनी में माफिया पप्पू गंजिया के खिलाफ 2023 में दर्ज मामले में यह कार्रवाई अब तक लंबित है।
2022 में सिविल लाइंस में अंतरराज्यीय चोर गिरोह के सरगना पंकज सिंह उर्फ भूपेंद्र सिंह समेत अन्य की भी संपत्तियां अब तक नहीं खोजी जा सकी हैं।
पूरामुफ्ती में गोतस्कर गिरोह के सदस्य दो हिस्ट्रीशीटर भाइयों जैद-उबैद का भी नाम इन्हीं में शुमार है, जिन पर तीन साल पहले गैंगस्टर लग चुका है।
नैनी में कुख्यात गोतस्कर पर दो साल पहले गैंगस्टर का केस लिखा गया, जिसमें 14(1) की कार्रवाई लंबित है।
क्या है गैंगस्टर एक्ट
गैंगस्टर एक्ट को संगठित अपराध पर कार्रवाई के लिए सबसे मुफीद कानून माना जाता है। इसमें आर्थिक लाभ के लिए एक साथ मिलकर आपराधिक घटनाओं को अंजाम देने वालों का गैंगचार्ट तैयार होता है, जिसे पुलिस अपने रिकाॅर्ड में रजिस्टर्ड कर नाम दिया जाता है। गैंग के सदस्यों के आपराधिक इतिहास के आधार पर उसे डी, आईडी, आईआर, व आईएस गिरोह का नाम दिया जाता है। इस एक्ट की धारा 14(1) के तहत जिला मजिस्ट्रेट की अनुमति से गैंग के सदस्यों की ओर से अपराध से अर्जित संपत्ति की जब्तीकरण की कार्रवाई भी की जाती है।