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प्रयागराज पुलिस कमिश्नरेट : माफिया राज पर चोट, आर्थिक साम्राज्य भी ढहाया, आईएस-227 के 44 सदस्यों को जेल

Mon, 27 Nov 2023 12:13 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

प्रयागराज के सबसे बड़े सिरदर्द आईएस-227 गिरोह को पिछले एक साल में 243 करोड़ की चोट देकर पुलिस ने माफिया एंड कंपनी के आर्थिक साम्राज्य की कमर तोड़ दी। हालांकि, यातायात व्यवस्था में व्यापक सुधार व मूलभूत संसाधनों की दरकार अभी भी है। कई घटनाएं भी हुईं।
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रमित शर्मा, पुलिस कमिश्नर प्रयागराज। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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प्रयागराज में पुलिस आयुक्त प्रणाली को लागू हुए रविवार को एक साल हो गए। इस दौरान पुलिस व्यवस्था में कई बदलाव देखने को मिले। उमेश पाल हत्याकांड के बाद चले अभियान में माफिया राज पर तगड़ी चोट हुई तो संगठित अपराध करने वालों पर भी शिकंजा कसा गया। अफसरों की संख्या में इजाफा होने से शिकायतों की सुनवाई व निस्तारण में तेजी आई। उधर, महिला अपराध समेत गंभीर मामलों में भी कमी आई।

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प्रयागराज के सबसे बड़े सिरदर्द आईएस-227 गिरोह को पिछले एक साल में 243 करोड़ की चोट देकर पुलिस ने माफिया एंड कंपनी के आर्थिक साम्राज्य की कमर तोड़ दी। हालांकि, यातायात व्यवस्था में व्यापक सुधार व मूलभूत संसाधनों की दरकार अभी भी है। कई घटनाएं भी हुईं, जो पुलिस के लिए चुनौती का सबब भी बनीं। पुलिस कमिश्नरेट के कामकाज पर पेश है एक रिपोर्ट।

अतीक एंड कंपनी को 243 करोड़ की चोट

पुलिस आयुक्त प्रणाली लागू होने के बाद सबसे बड़ा प्रहार माफिया राज पर हुआ। अतीक एंड कंपनी के साथ ही संगठित अपराध करने वालों पर नकेल कसते हुए उनके आर्थिक साम्राज्य को भी तगड़ी चोट दी गई। अतीक के 45 करोड़ के मकान, जमीन व लग्जरी वाहन जब्त किए गए तो हाल ही में उसके गुर्गे असाद कालिया की 12 करोड़ के ड्यूप्लेक्स को भी ध्वस्त कराया गया। अकेले उमेश पाल हत्याकांड में ही 16 करोड़ की संपत्ति पर कार्रवाई की गई। 50 करोड़ की वक्फ भूमि समेत 70 करोड़ की संपत्ति ध्वस्तीकरण, जब्तीकरण के लिए चिह्नित है। 100 करोड़ की ऐसी बेनामी संपत्ति भी चिह्नित की गई, जिनकी खरीद फरोख्त पर राजस्व विभाग को रिपाेर्ट भेजकर रोक लगवाई गई। इनमें कसारी-मसारी स्थित एक संपत्ति भी शामिल है।

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इंटरस्टेट गिरोह सरगना मुजफ्फर समेत पांच चिह्नित माफिया सलाखों के पीछे

आईएस-227 गिरोह के 44 सदस्य जेल भेजे गए, जबकि जिले के विभिन्न थानों में इस गिराेह के सदस्यों, माफिया के मददगारों समेत 116 आपराधिक तत्वों पर एफआईआर दर्ज की गई। जेल से बाहर आने की कोशिशों में जुटे अतीक के सबसे खास शूटर फरहान व जुिल्फकार उर्फ तोता पर शिकंजा कसा गया। साथ ही 50 हजार के इनामी नफीस, असाद कालिया को जेल भेज अतीक के आर्थिक स्रोत को भी ब्लॉक कर दिया गया। अतीक के अलावा महज प्रयागराज नहीं, बल्कि कई जनपदोंं की पुलिस के लिए चुनौती बने इंटरस्टेट गोतस्कर गिरोह के सरगना मो.मुजफ्फर की तमाम तिकड़माें को नाकाम करते हुए जेल भेजा गया। वहीं, माफियागीरी करने वाले गणेश यादव, पप्पू गंजिया को भी सलाखों के पीछे पहुंचाया गया।

हत्या में 27 प्रतिशत, दुष्कर्म के केस में 38 फीसदी की कमी

पिछले साल के मुकाबले पुलिस आयुक्त प्रणाली लागू होने के बाद के 12 महीनों में हत्या में 27 तो दुष्कर्म के केस में 38 फीसदी की कमी दर्ज की गई। 2022 में हत्या के कुल 148 केस जनपदभर में दर्ज हुए, जबकि मौजूदा साल में 109 हैं। पिछले साल गंगानगर में सबसे ज्यादा हत्या की 60 वारदातें हुईं। इसके बाद यमुनानगर में 47, जबकि नगर जोन में 41 कत्ल हुए। इस साल गंगानगर में 26, यमुनानगर में 48 तो शहर में हत्या की 35 वारदातें हुईं। इसी तरह 2022 में दुष्कर्म के कुल 429 केस दर्ज हुए, जबकि मौजूदा साल में ऐसे 269 मामले दर्ज किए गए। गंगानगर में पिछले साल के 193 केस के मुकाबले मौजूद साल में 106, यमुनानगर में 125 के मुकाबले 82 और नगर जोन में 111 के मुकाबले 81 मुकदमे दर्ज हुए।

अतीक को पहले मुकदमे में दिलाई सजा, 349 को कराया दोषसिद्ध

प्रयागराज कमिश्नरेट ने ऑपरेशन कन्विक्शन के तहत जनपद में 349 अपराधियों को सजा दिलाई। जुलाई से अब तक 171,जबकि शेष 178 अपराधियों को पिछले साल दिसंबर से मौजूदा साल के जून तक दोषसिद्ध कराया गया। इसमें एक बड़ी उपलब्धि माफिया अतीक को किसी मुकदमे में सजा दिलाना रहा। 100 से अधिक मुकदमों के आरोपी अतीक को प्रयागराज पुलिस ने उमेशपाल अपहरण कांड में दोष सिद्ध कराया, जिसमें उसे उम्रकैद की सजा हुई। इसी मुकदमे में पुलिस की प्रभावी पैरवी के ही फलस्वरूप उसके दो सहयोगी खान शौलत हनीफ व दिनेश पासी को भी आजीवन कारावास का दंड मिला।

फीडबैक सेल से जनसुनवाई की गुणवत्ता में सुधार

पुलिस आयुक्त प्रणाली लागू होने के बाद आम जन की शिकायतों की सुनवाई व निस्तारण में भी तेजी आई। पुलिस आयुक्त व तीनों जोन के डीसीपी के स्तर पर एक-एक फीडबैक सेल का भी गठन हुआ। खास बात यह कि डीसीपी के अलावा मुख्यालय स्तर पर गठित फीडबैक सेल भी रैंडम आधार पर शिकायतकर्ताओं से फोन पर फीडबैक लेती है। इसके चलते जनसुनवाई के स्तर में सुधार आया। हालांकि, जनसुनवाई की एक श्रेणी आईजीआरएस में कुछ मौकों पर जनपद पीछे भी रहा।

मुठभेड़ में 50 हजार के दो इनामी दो ढेर, 10 अन्य गिरफ्तार

एक साल में 50 हजार के दो इनामी पुलिस मुठभेड़ में ढेर हो गए। इनमें दिनदहाड़े उमेश पाल हत्याकांड को अन्जाम देने वाले आरोपी अरबाज व विजय चौधरी उर्फ उस्मान शामिल हैं। इसके अलावा 10 ऐसे इनामी रहे जिन्हें, मुठभेड़ के दौरान गिरफ्तार किया गया। इनमें 50 हजार के दो इनामी अतीक के करीबी असाद कालिया व नफीस बिरयानी शामिल हैं। पुलिस ने एक साल की अवधि में कुल 31 इनामी अपराधियों पर कार्रवाई की। इनमें 50 हजार के दो ढेर हुए तो पांच को जेल भेजा गया। इसके अलावा 25 हजार के 17, 15 हजार के दो, 10 हजार के तीन व पांच हजार के दो इनामी शामिल हैं।

यातायात व्यवस्था में व्यापक सुधार की दरकार

कमिश्नरेट पुलिस के सामने यातायात व्यवस्था चुनौती अब भी बनी है। बड़े आयोजनों के मौकों पर तमाम कवायदें नाकाफी भी साबित हुई हैं। फिर चाहे व पिछला माघ मेला रहा हो या अन्य आयोजन। संसाधन की कमी के साथ ही इसके तमाम अन्य कारण भी हैं। जानकारों का कहना है कि माघ मेले के साथ ही 2025 में होने जा रहे कुंभ को देखते हुए इंतजाम करने होंगे। जनपदीय यातायात पुलिस में स्वीकृत सभी 550 पदों पर जल्द पुलिसकर्मियों की नियुक्ति की जानी चाहिए।

मौजूदा समय में स्वीकृत संख्या बल के आधे से भी कम पुलिसकर्मी यातायात पुलिस में तैनात हैं। इसके अलावा पुलिस उपायुक्त यातायात के पद का भी सृजन किया जाना चाहिए। मौजूदा समय में यातायात व्यवस्था के प्रबंधन की जिम्मेदारी सहायक पुलिस उपायुक्त(एडीसीपी) स्तर के अधिकारी पर ही है। यातायात व्यवस्था को बड़े पैमाने पर प्रभावित करने वाले ई रिक्शा के संचालन को लेकर रूट प्लान तमाम बैठकों के बाद भी सड़क सुरक्षा समिति तय नहीं कर सकी है।
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50 किमी की तय करनी पड़ रही फरियादियों को दूरी

पुलिस आयुक्त प्रणाली लागू होने के 12 महीने बाद भी मूलभूत संसाधनों की दरकार है। अभी डीसीपी कार्यालय नहीं बन सके हैं, जिससे दूरदराज के गांव वालों को लंबी दूरी तय कर मुख्यालय तक आना पड़ रहा है। डीसीपी यमुनानगर पुलिस मुख्यालय स्थित कार्यालय में बैठ रहे हैं। ऐसे में कोरांव से आने वाले फरियादी को 50 किमी का सफर तय करना पड़ता है। डीसीपी गंगानगर भी अभी पुराने कार्यालय में ही बैठ रहे हैं। डीसीपी नगर का कार्यालय चौक में स्थित है, जहां जाने के लिए फरियादियों को जाम से जूझना पड़ता है। तीनों अफसरों का नया कार्यालय बनना है। पुलिस आयुक्त ने पुलिस मुख्यालय में जनसुनवाई शुरू की है। हालांकि उनका दफ्तर अभी भी कैंप कार्यालय से ही संचालित हो रहा है। डीसीपी कार्यालय के बाबत उच्चाधिकारियों का कहना है कि जमीनें चिह्नित कर प्रस्ताव भेजा गया है।

पांच लाख के तीन इनामी समेत छह अब भी पकड़ से दूर

उमेश पाल हत्याकांड में पांच-पांच लाख के तीन इनामी समेत छह आरोपी अब भी पकड़ से दूर हैं। इनमें गुड्डू मुस्लिम, साबिर व अरमान के अलावा शाइस्ता परवीन, आयशा नूरी, जैनब फातिमा शामिल हैं। माफिया के मददगार जैद मास्टर समेत अन्य भी अभी नहीं पकड़े जा सके हैं। हालांकि पुलिस ने तेजी से कार्रवाई करते हुए पूर्व में गिरफ्तार कर जेल भेजे गए आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दायर की है।
 
  1. घटनाएं, जो बनीं चुनौती
  • उमेश पाल हत्याकांड
  • अतीक-अशरफ हत्याकांड
  • खीरी में छात्र की हत्या
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