लॉकडाउन में स्कूल भी बंद था, जिस पर उन्होंने बच्चों को गांव छोड़ने को कहा। विनोद भी राजी हो गया। उसने वादा किया था कि शनिवार को वह पत्नी व बच्चों को लेकर घर आएगा। सभी उसकी राह देख रहे थे। वह तो नहीं आया लेकिन उसकी मौत की खबर आ गई। बिलखते परिजनों ने बताया कि विनोद अपने दोनों बच्चों से बेहद प्यार करता था। वह यह मानने को भी तैयार नहीं थे कि उसने अपने परिवार की हत्या कर दी। बेटे, बहू व बच्चों की मौत पर मां नवरंगी देवी तो बदहवास सी हो गईं थीं।
उधर, घटना की जानकारी पर रिश्तेदारों के अलावा बड़ी संख्या में आसपास के लोग भी जमा हो गए। ग्रामीण परिजनों को ढांढस बंधाते रहे। जानकारी पर ग्रुप सेंटर पहुंचे प्रदीप व अमन ने भाई, भाभी व बच्चों की खून से लथपथ लाशें देखीं तो उनकी भी आंखें नम हो र्गईं। पुलिस अफसरों की पूछताछ में वह दोनों भी यही कहते रहे कि एक दिन पहले ही पिता से फोन पर बातचीत हुई थी। तब उन्होंने किसी तरह के तनाव की बात नहीं बताई थी।