सेना में चयन से पहले इंटरव्यू में अभ्यर्थियों को जिन कसौटियों पर परखा जाता है, उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) भी उन्हीं कसौटियों पर भावी पीसीएस अफसरों को परखेगा। यूपीपीएससी और अन्य राज्यों के आयोगों में इंटरव्यू तकनीक में बड़ा बदलाव होने जा रहा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन ‘विकसित भारत-2047’ को ध्यान में रखते हुए आयोगों के माध्यम से ऐसे प्रशासनिक अफसर खोजे जाएंगे, जिनमें उच्चकोटि की नेतृत्व क्षमता, नैतिकता, ईमानदारी, साहस, सहानुभूति और संवदेनशीलता हो। यूपीपीएससी में सोमवार को देश के 14 राज्यों के लोक सेवा आयोगों के सदस्यों की ‘इंटरव्यू तकनीक’ विषय पर राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। देश में आयोगों के सदस्यों की यह पहली कार्यशाला है।
मुख्य अतिथि इलाहाबाद हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायमूर्ति मनोज कुमार गुप्ता ने इस कार्यशाला के दूरगामी परिणाम आने की उम्मीद जताई। वहीं, बतौर विशेषज्ञ सेना के सेलेक्शन सेंटर, ईस्ट के कमाडेंट मेजर जनरल मनोज कुमार ने सेना में इंटरव्यू तकनीक से आयोगों के सदस्यों को अवगत कराया। मेजर जनरल मनोज कुमार ने बताया कि जब हम इंटरव्यू लेते हैं तो मिल्खा सिंह नहीं, बल्कि विक्रम बत्रा जैसा अफसर ढूंढ़ते हैं, जिसमें उच्चकोटि की नेतृत्व क्षमता और साहस हो।
सेलेक्शन कोई भी हो, अभ्यर्थी लिखित परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद इंटरव्यू तक पहुंचता है। ऐसे में इंटरव्यू के दौरान उसके ज्ञान को नहीं, बल्कि व्यक्तित्व को परखने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि इंटरव्यू कभी धारणा बनाकर नहीं लेना चाहिए। बोर्ड में बैठे विशेषज्ञ अभ्यर्थी के व्यक्तित्व को इस तरह से परखें कि वह आने वाले 30-40 वर्षों में नौकरी के दौरान अपनी जिम्मेदारी को ईमानदारी के साथ पूरा कर सके।
यूपीपीएससी के अध्यक्ष संजय श्रीनेत ने इंटरव्यू तकनीक पर मेजर जनरल की प्रस्तुति का समर्थन करते हुए कहा कि कार्यशाला के दौरान इस कुंभ नगरी में जो बीज पड़ा है, वह आने वाले समय में एक वृक्ष का रूप लेगा। उन्होंने इंटरव्यू तकनीक में बदलाव पर जोर देते हुए कहा कि ज्ञान का परीक्षण तो लिखित परीक्षा के माध्यम से हो जाता है लेकिन व्यक्तित्व का सही परीक्षण इंटरव्यू में होता है।
उन्होंने विभिन्न आयोगों से आए सदस्यों से आग्रह किया कि अपने-अपने राज्यों में भी इस बदलाव को अपनाते हुए उच्च कोटि की नेतृत्व क्षमता वाले ईमानदारी, संवदेनशील और नैतिक जिम्मेदारी समझने वाले प्रशासक तैयार करें। बतौर विशेषज्ञ बीएचयू के पूर्व वीसी और आईसीएआर के पूर्व डीजी प्रो.. पंजाब सिंह ने बताया कि इंटरव्यू के माध्यम से हम ऐसा प्रशासक खोज सकते हैं जो समाज के हर वर्ग को नजदीक से समझे। ऐसे ही प्रशासक कृषि प्रधान इस देश को ‘विकसित भारत-2047’ के लक्ष्य तक पहुंचा सकेंगे।
एथिक्स प्रशिक्षक नंदितेश निलय ने आयोगों के सदस्यों से कहा कि व्यक्तित्व का आकलन अगर एथिक्स के आधार पर नहीं होता है तो वह अधूरा है। उन्होंने सदस्यों से आग्रह किया कि इंटरव्यू में एथिक्स को केंद्र में रखकर सवाल पूछे जाएं। सरकार भी चाहती है कि अफसर अपनी नैतिक जिम्मेदारी को समझें और यह तभी हो सकता है, जब इंटरव्यू के दौरान एथिक्स के आधार पर अभ्यर्थी को व्यक्तित्व परीक्षण हो।