फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Prayagraj : स्वतंत्रता सेनानी कमलाकांत तिवारी का गंगा घाट पर राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार

Wed, 19 Jun 2024 11:12 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

स्वतंत्रता संग्राम के समय अंग्रेजों के दांत खट्टे करने वाले सेनानी को नम आंखों से अंतिम विदाई दी। सुबह करीब सवा आठ बजे नरवर चौकठा गंगा घाट पर पुलिस के जवानों ने राजकीय सम्मान के साथ उन्हें सलामी दी। इसके बाद बड़े बेटे राजेंद्र प्रसाद तिवारी ने उन्हें मुखाग्नि दी।
विज्ञापन
स्वतंत्रता सेनानी कमलाकांत तिवारी को अंतिम सलामी देते पुलिस के जवान। - फोटो : अमर उजाला।
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

नरवर चौकठा गंगा घाट पर स्वतंत्रता संग्राम सेनानी कमलाकांत तिवारी (106) को पुलिस के जवानों ने अंतिम सलामी दी। इसी के साथ राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार कर दिया गया। उनके बड़े पुत्र राजेंद्र प्रसाद ने मुखाग्नि दी। आजादी के दीवाने की अंतिम यात्रा में प्रशासनिक अमले के साथ इलाके के लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी।

स्वतंत्रता संग्राम के समय अंग्रेजों के दांत खट्टे करने वाले सेनानी को नम आंखों से अंतिम विदाई दी। सुबह करीब सवा आठ बजे नरवर चौकठा गंगा घाट पर पुलिस के जवानों ने राजकीय सम्मान के साथ उन्हें सलामी दी। इसके बाद बड़े बेटे राजेंद्र प्रसाद तिवारी ने उन्हें मुखाग्नि दी। नायब तहसीलदार ने राजकीय सम्मान के रूप में सेनानी के अंतिम संस्कार के लिए परिजनों को 12 हजार रुपये प्रदान किए।

विज्ञापन


इस दौरान बेटे राजधर तिवारी, एसीपी रविकुमार गुप्ता, नायाब तहसीलदार अनुग्रह नारायण सिंह, इंस्पेक्टर मांडा शैलेंद्र सिंह, दरोगा डॉ बाबूराम,संनेश बाबू गौतम, लेखपाल राकेश तिवारी,राघवेंद्र यादव सहित समाजसेवी राम मिश्रा, प्रबंधक कृष्ण विजय यादव आदि रहे। स्वतंत्रता सेनानी कमलाकांत तिवारी का जन्म 03 मई सन 1919 में मांडा क्षेत्र के दिघीया गांव में हुआ। महात्मा गांधी के अंग्रेजों भारत छोड़ो आंदोलन से प्रभावित होकर जंग-ए-आजादी की लड़ाई में कूद पड़े।

विज्ञापन

रेल पटरी उखाड़ने पर किए गए थे गिरफ्तार

उंचडीह रेलवे स्टेशन को आग के हवाले करने और बभनी हेठार गांव के सामने रेल पटरी उखाड़ने के मामले में अंग्रेजी हुकूमत ने उन्हें गिरफ्तार किया। करीब सात माह उन्हें जेल में बिताना पड़ा। अंग्रेजी हुकूमत से लड़ाई के दौरान पारिवारिक सदस्यों पर संकट आता देख उन्हें मूल निवास दिघीया गांव को छोड़ना पड़ा और मांडा क्षेत्र के बरहाकला गांव में नया निवास स्थान बनाना पड़ा।

आजादी की लड़ाई के दौरान भाग दौड़ अधिक होने से उन्हें आर्थिक तंगी का भी सामना करना पड़ा, लेकिन आजादी की दीवानगी नही छोड़ी। बभनी हेठार,आंधी, लक्षन चौकठा, ढिलिया, मसौली में रहने वाले सहपाठी व सहयोगियों से मदद ली और अंग्रेजों को देश से बहार भगाने में जुटे रहे। पूर्व पीएम इंदिरा गांधी व पूर्व सीएम हेमवंती नंदन बहुगुणा ने क्रमशः तांबे का सील्ड,चांदी का बैज लगाकर उन्हें सम्मानित किया। मंगलवार शाम करीब 05 बजे बरहा कला आवास पर उन्होंने अंतिम सांस ली।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें