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Prayagraj: अतुल माहेश्वरी छात्रवृत्ति ने बदली नेत्रहीन की दुनिया, सीखी खेल की बारीकियां, अब बन रहे नजीर

Tue, 12 Dec 2023 11:26 AM IST
अनुज कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज

सार

अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से दी जाने वाली अतुल माहेश्वरी छात्रवृत्ति की मदद से धर्मेंद्र न सिर्फ अपनी पढ़ाई को जारी रखे हुए हैं। वहीं, खेल के क्षेत्र में वह उत्तर प्रदेश की नेत्रहीन क्रिकेट टीम का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।
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धर्मेंद्र कुमार। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से दी जाने वाली अतुल माहेश्वरी छात्रवृत्ति ने प्रयागराज के नेत्रहीन धर्मेंद्र कुमार की अंधेरी जिंदगी में रोशनी भर दी है। छात्रवृत्ति की मदद से धर्मेंद्र न सिर्फ अपनी पढ़ाई को जारी रखे हुए हैं, बल्कि खेल की बारीकियों को सीखकर प्रदेश का नाम भी रोशन कर रहे हैं। पढ़ाई के क्षेत्र में जहां वह बीएचयू जैसे प्रतिष्ठित संस्थान से स्नातक कर रहे हैं। वहीं, खेल के क्षेत्र में वह उत्तर प्रदेश की नेत्रहीन क्रिकेट टीम का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। साथ ही वह जूडो में राष्ट्रीय स्तर पर कई मेडल भी जीत चुके हैं।

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धर्मेंद्र ने क्रिकेट एसोसिएशन फॉर द ब्लाइंड इन इंडिया (कैबी) और समर्थनम ट्रस्ट फॉर द डिसेबल्ड की ओर से इंदौर में स्थित इंडेक्स मेडिकल कॉलेज मैदान पर 8-10 दिसंबर तक आयोजित हुए चार दिवसीय क्रिकेट प्रतियोगिता में उत्तर प्रदेश की टीम से प्रतिभाग किया और शानदार प्रदर्शन करते हुए टीम को फाइनल तक पहुंचाया। हालांकि, सोमवार को गुजरात से खेले गए फाइनल मैच में उत्तर प्रदेश को 84 रन से हार का सामना करना पड़ा और टीम उपविजेता बनी। इस प्रतियोगिता में प्रदर्शन के आधार पर क्रिकेट एसोसिएशन फॉर द ब्लाइंड इन इंडिया अगली ब्लाइंड भारतीय पुरुष क्रिकेट टीम का चयन भी होना है। प्रदर्शन के आधार पर धर्मेंद्र के भी टीम में चुने जाने की संभावना है।

मऊआइमा के तेजपुर गांव के रहने वाले धर्मेंद्र कुमार पूरी तरह से नेत्रहीन हैं। तीन वर्ष की उम्र में ही आंख में चोट लगने से उनकी रोशनी धीरे-धीरे कर पूरी खत्म हो गई। इसके बाद पिता राम सेवक पटेल को लोगों ने सलाह दी कि नेत्रहीन स्कूल में बेटे का दाखिला करा दें। इसके बाद किसान पिता ने किसी तरह बेटे को हाईस्कूल तक पढ़ाया। हाईस्कूल के बाद वर्ष 2020 में धर्मेंद्र ने अतुल माहेश्वरी छात्रवृत्ति परीक्षा को पास कर लिया। इसमें उन्हें 50 हजार रुपये मिले, जिसको उन्होंने पढ़ाई व अपनी फिटनेस पर लगाया। इसके बाद से वह लगातार खेल में बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं। अब उन्हें उम्मीद है कि वह जल्द ही भारतीय नेत्रहीन क्रिकेट टीम की ओर से अंतरराष्ट्रीय मैच खेलते नजर आएंगे।

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जूडो में जीते कई पदक
धर्मेंद्र राष्ट्रीय स्तर की जूडो प्रतियोगिता में वर्ष 2016 से लेकर अबतक एक स्वर्ण, तीन रजत और एक कांस्य पदक जीत चुके हैं। जूडो में राष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने के बाद जब उन्हें प्रदेश सरकार और एसोसिएशन की ओर से कोई मदद नहीं मिली तो उन्होंने जूडो को छोड़कर क्रिकेट खेलना शुरू कर दिया। उनको किसी ने बताया था कि क्रिकेट में सरकार व एसोसिएशन की ओर से मदद तो होती ही है साथ ही इस खेल में अंतरराष्ट्रीय टीम तक का सफर तय करके बड़ा नाम स्थापित किया जा सकता है।

प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी में भी जुटे
धर्मेंद्र बीएचयू में स्नातक अंतिम वर्ष के छात्र हैं। वह खेल के साथ ही प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी भी करते हैं। एसएससी की एमटीएस, बैंक और रेलवे जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं।
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मदद नहीं मिलने पर हुए निराश
धर्मेंद्र का कहना है कि क्रिकेट की किट खरीदने व अन्य संसाधनों पर ठीकठाक पैसों को खर्च करना पड़ता है। घर से ही मदद मिलती है, लेकिन बार-बार घर पर कहने में हिचक होती है। उन्होंने प्रदेश सरकार से नेत्रहीनों के खेल पर सरकारी पैसा खर्च करने की गुहार लगाई है।
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