जूडो में जीते कई पदक
धर्मेंद्र राष्ट्रीय स्तर की जूडो प्रतियोगिता में वर्ष 2016 से लेकर अबतक एक स्वर्ण, तीन रजत और एक कांस्य पदक जीत चुके हैं। जूडो में राष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने के बाद जब उन्हें प्रदेश सरकार और एसोसिएशन की ओर से कोई मदद नहीं मिली तो उन्होंने जूडो को छोड़कर क्रिकेट खेलना शुरू कर दिया। उनको किसी ने बताया था कि क्रिकेट में सरकार व एसोसिएशन की ओर से मदद तो होती ही है साथ ही इस खेल में अंतरराष्ट्रीय टीम तक का सफर तय करके बड़ा नाम स्थापित किया जा सकता है।
प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी में भी जुटे
धर्मेंद्र बीएचयू में स्नातक अंतिम वर्ष के छात्र हैं। वह खेल के साथ ही प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी भी करते हैं। एसएससी की एमटीएस, बैंक और रेलवे जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं।
मदद नहीं मिलने पर हुए निराश
धर्मेंद्र का कहना है कि क्रिकेट की किट खरीदने व अन्य संसाधनों पर ठीकठाक पैसों को खर्च करना पड़ता है। घर से ही मदद मिलती है, लेकिन बार-बार घर पर कहने में हिचक होती है। उन्होंने प्रदेश सरकार से नेत्रहीनों के खेल पर सरकारी पैसा खर्च करने की गुहार लगाई है।