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प्रयागराज : भाजपा-अपना दल एस गठबंधन ने प्रतापपुर से पूर्व मंत्री राकेशधर त्रिपाठी को बनाया प्रत्याशी

Sun, 06 Feb 2022 07:48 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

जिले के कद्दावर नेता माने जाने वाले पूर्व मंत्री राकेशधर पहली बार अपने गृह विधानसभा से न लड़कर पड़ोस की प्रतापपुर विधानसभा से प्रत्याशी मैदान में उतरेंगे। हंडिया विधानसभा सीट में पूर्व मंत्री राकेशधर त्रिपाठी तथा उनके परिवार का दबदबा रहा है। वर्ष 1985 से लेकर अब तक उन्हें चार बार जीत मिली, जबकि पांच में वे उपविजेता रहे। वहीं 1991 के चुनाव में तीसरे स्थान से संतोष करना पड़ा।
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Prayagraj News : राकेशधर त्रिपाठी और अनुप्रिया पटेल। - फोटो : प्रयागराज
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विस्तार
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अपना दल एस ने प्रतापपुर विधानसभा सीट से पूर्व विधायक राकेश धर त्रिपाठी को टिकट दिया है। अपना दल से राकेश धर को प्रत्याशी बनाए जाने के साथ भाजपा गठबंधन ने अब तक जिले की 12 विधानसभा सीट में से 11 में प्रत्याशियों के नाम की घोषणा कर दी है। प्रतापपुर सीट से राकेश धर पहली बार चुनाव लड़ेंगे। इसके पूर्व विधानसभा चुनाव हंडिया विधानसभा से लड़ा था।

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राकेश धर का राजनीतिक कॅरियर काफी पुराना है। सैदाबाद विकासखंड के मौजा चौराबडेरा गांव के निवासी राकेश धर पहली बार जनता पार्टी के टिकट पर 1985 में विधायक बने। 1989 में वह जनता दल से दूसरी बार विधायक चुने गए। इसके बाद 1991 के चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा। 1993 का चुनाव वह निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में लड़े, जबकि 1996 में वह भाजपा के टिकट पर हंडिया सीट से विधायक निर्वाचित हुए।



हालांकि वर्ष 2002 के चुनाव में वह भाजपा के टिकट पर चुनाव हार गए। इसके बाद 2007 का चुनाव वह बसपा से लड़े और जीते भी, लेकिन 2012 में उन्हें एक बार फिर से हार का सामना करना पड़ा। 2014 में भदोही संसदीय क्षेत्र से उन्होंने लोकसभा का चुनाव लड़ा लेकिन उसमें वह पराजित हो गए थे। अब एक बार फिर से वह भाजपा गठबंधन की सीट प्रतापपुर से चुनाव लड़ने जा रहे हैं।  ब्यूरो
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बता दें कि हंडिया विधानसभा सीट में पूर्व मंत्री राकेशधर त्रिपाठी तथा उनके परिवार का दबदबा रहा है। वर्ष 1985 से लेकर अब तक उन्हें चार बार जीत मिली, जबकि पांच में वे उपविजेता रहे। वहीं 1991 के चुनाव में तीसरे स्थान से संतोष करना पड़ा। सपा व बसपा के वर्चस्व वाली इस सीट पर भाजपा व कांग्रेस मात्र एक बार ही सेंध लगा सकीं। दोनों ही प्रमुख दलों को दोबारा इस सीट पर जीत का इंतजार है।  


राकेशधर ने सपा को छोडक़र हर प्रमुख पार्टी से चुनाव लड़ा। 1989 के चुनाव में वजह जनता दल के टिकट पर विधायक चुने गए तो 1993 में वह निर्दलीय उम्मीदवार रहे। हालांकि दूसरे स्थान पर रहे। 1985 से 2012 के बीच राकेशधर आठ बार चुनाव लड़े और चार बार विधायक चुने गए। 2002 के चुनाव से 2012 के बीच का चुनाव राकेशधर बनाम महेश नारायण सिंह रहा।

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2022 में राकेशधर को मिली थी महेश नारायण से शिकस्त
2002 के चुनाव में सपा के महेश नारायण सिंह ने राकेशधर को मात दी थी तो 2007 में राकेशधर ने महेश नारायण को हराया। इसके बाद 2012 के चुनाव में फिर महेश नारायण सिंह विजयी हुए। वहीं राकेशधर दूसरे स्थान पर रहे लेकिन कुछ समय बाद ही महेश नारायण का निधन हो गया।


इसके बाद 2013 में हुए उपचुनाव में महेश नारायण के बेटे प्रशांत सपा से चुनाव लड़े और विजयी हुए। वहीं राकेशधर त्रिपाठी के भतीजे पंकज बीएसपी से चुनाव लड़े और दूसरे स्थान पर रहे। 2017 के चुनाव में राकेशधर की पत्नी प्रमिला त्रिपाठी ने अपना दल से चुनाव लड़ा, लेकिन बसपा के हाकिम लाल बिंद से हार गईं।
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पहली बार हंडिया से नहीं मिला टिकट
राकेशधर के अलावा परिवार के दो सदस्यों ने इस सीट से दावेदारी की लेकिन जीत नहीं मिली। इस चुनाव में भी राकेशधर त्रिपाठी तथा महेश नारायण सिंह के बेटे प्रशांत सिंह टिकट के दावेदारों में शामिल हैं। पहली बार राकेशधर को उनके गृह विधानसभा हंडिया से हटाकर पड़ोस की प्रतापपुर सीट से उम्मीदवार बनाया गया है।


हंडिया सीट भाजपा ने अपने ही दूसरे सहयोगी दल निषाद पार्टी को दे दी है। निषाद पार्टी ने दो दिन पहले ही हंडिया से पूर्व विधायक महेश नारायण सिंह के पुत्र पूर्व विधायक प्रशांत सिंह राहुल को उम्मीदवार बनाया था, जिन्होंने शनिवार को नामांकन पत्र भी दाखिल कर दिया। 
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