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पुलिस नहीं करेगी व्यापारियों के खिलाफ मनमानी कार्रवाई, अपर मुख्य सचिव गृह ने हाईकोर्ट में दिया हलफनामा

Wed, 25 Aug 2021 09:57 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

 कोर्ट का कहना है कि यह लगातार देखने में आ रहा है कि पुलिस व्यापारियों के खिलाफ मनमाने तरीके से कार्रवाई कर रही है और उन पर धोखाधड़ी की धारा 420 के तहत मुकदमे दर्ज किए जा रहे हैं।
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allahabad high court - फोटो : social media
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विस्तार
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अपर मुख्य सचिव गृह अवनीश कुमार अवस्थी ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में आश्वासन दिया है कि व्यापारियों से जुड़े मामलों में पुलिस मनमाने तरीके से कार्रवाई नहीं करेगी। राज्य सरकार जल्द ही इस मामले में गाइडलाइन जारी करेगी। अवस्थी बुधवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट के निर्देश पर अदालत में उपस्थित हुए थे। कोर्ट ने मंगलवार को जारी एक आदेश में अपर मुख्य सचिव गृह के अलावा एसपी जालौन रवि कुमार और नंदी गांव थाना जालौन के सब इंस्पेक्टर केदार सिंह को तलब किया था।
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 कोर्ट का कहना है कि यह लगातार देखने में आ रहा है कि पुलिस व्यापारियों के खिलाफ मनमाने तरीके से कार्रवाई कर रही है और उन पर धोखाधड़ी की धारा 420 के तहत मुकदमे दर्ज किए जा रहे हैं। जालौन के व्यापारी विशाल गुप्ता की याचिका पर न्यायमूर्ति एसपी केसरवानी और न्यायमूर्ति पीयूष अग्रवाल की पीठ ने सुनवाई की ।

याची के खिलाफ 20 फरवरी को नंदी गांव थाने में धोखाधड़ी और सरकारी अधिकारी के आदेश का उल्लंघन करने का मुकदमा दर्ज किया गया था। जिसे कोर्ट में चुनौती देते हुए उसने कहा कि वह ट्रांसपोर्ट का व्यवसाय करता है और अपने ट्रक पर  सुपारी व तंबाकू लेकर जा रहा था। सब इंस्पेक्टर केदार सिंह ने उसकी गाड़ी रोक ली तथा वाहन पर लदे माल से संबंधित सभी वैध दस्तावेज दिखाने के बावजूद उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया।
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कोर्ट के आदेश पर उपस्थित हुए अपर मुख्य सचिव गृह और एसपी जालौन ने हलफनामा दाखिल कर बताया कि दोषी पुलिस अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है और याची व्यापारी के खिलाफ दर्ज मुकदमे में फाइनल रिपोर्ट लगा दी गई है। कोर्ट ने कहा कि पुलिस की इस मनमानी कार्रवाई से राज्य सरकार की व्यापारियों को सहूलियत देने की नीति को धक्का लग रहा है। प्राथमिकी को देखने से ही स्पष्ट है कि इसे जानबूझकर परेशान करने के इरादे से दर्ज किया गया है। इसके पूर्व कोर्ट ने 13 अगस्त को इस मामले में एसपी जालौन से जवाब मांगा था मगर सुनवाई के दौरान उनकी ओर से कोई जवाब नहीं दिया गया, जिस पर कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया और अधिकारियों को तलब किया था।
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