हालांकि लगभग 1.5 साल का वक्त बीतने के बाद भी उसे खोजा नहीं जा सका। मुकदमे में नामजद कुल छह लोगों में से विजयकांत समेत तीन के खिलाफ तो चार्जशीट लगा दी गई। लेकिन प्रवक्ता समेत तीन का आज तक कुछ पता नहीं चल पाया और उनके खिलाफ 19 महीने बाद भी विवेचना जारी है।
आईटी एक्ट का मुकदमा होने के कारण विवेचना तत्कालीन सोरांव इंस्पेक्टर को सौंपी गई थी। हालांकि इस बारे में पूछने पर मौजूदा इंस्पेक्टर सतीश कुमार का कहना है कि उन्हें इस मुकदमे की जानकारी नहीं है। उधर, एसीपी थरवई चंद्रपाल सिंह ने कहा कि उन्हें प्रकरण के संबंध में जानकारी नहीं है। सुबह कार्यालय पहुंचने पर ही कुछ बता पाऊंगा।