इस पर याची के अधिवक्ता ने दलील दी कि खान का तबादला विभागीय नीति के विरुद्ध किया गया है। स्थानांतरण नीति में संबद्धीकरण है ही नहीं। याची का सेवाकाल भी सिर्फ 14 महीने बचा है। कोर्ट ने गोपनीयता भंग करने जैसे गंभीर आरोप के बावजूद संबद्धीकरण पर हैरानी जताई। कहा, प्रतीत हो रहा है कि पुलिस विभाग में याची की कोई रक्षा कर रहा है या फिर तबादला आदेश का बचाव करने के लिए कमजोर आधार पर आरोप लगाए गए हैं।
कोर्ट ने प्रयागराज पुलिस आयुक्त को 22 अगस्त तक जांच करके हलफनामा दाखिल कर स्थिति स्पष्ट करने का आदेश दिया है। कहा, पुलिस आयुक्त स्थिति को स्पष्ट करने में विफल रहे तो अदालत मामले में कड़ाई से पेश आएगी।
माफिया अतीक अहमद की मदद पर जिले से बाहर भेजे गए थे 25 पुलिसकर्मी
भाजपा नेता उमेश पाल की 24 फरवरी को दिनदहाड़े हत्या के महीनेभर बाद अतीक अहमद गैंग के मददगार 25 पुलिसकर्मियों को जिले से बाहर तैनाती दी गई थी। इनका तबादला प्रशासनिक आधार पर किया गया था। जिन पुलिसकर्मियों को हटाया गया था, उनमें दरोगा, हेड कांस्टेबल, कांस्टेबल के साथ उर्दू अनुवादक मुनव्वर खान भी शामिल है। अधिकांश को पश्चिमी उत्तर प्रदेश के दूरदराज इलाकों में गैरवरीयता वाले पदों पर तैनाती दी गई थी। कुछ को पीटीसी मुरादाबाद भी भेजा गया था। इन सभी के तबादला आदेश में प्रशासनिक आधार पर कार्रवाई की बात कही गई थी, लेकिन सूत्रों का यही कहना था कि अतीक अहमद के मददगार होने की शासन तक शिकायत के बाद इन्हें हटाया गया था।