फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

हाईकोर्ट : गो वध को लेकर पुलिस लापरवाह, कमिश्नर तलब, कोर्ट ने चार वर्षों में दर्ज केस की मांगी प्रगति रिपोर्ट

Wed, 22 Nov 2023 06:08 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

यह आदेश न्यायमूर्ति शेखर कुमार यादव ने प्रयागराज निवासी सैफ अली खान की ओर से दाखिल अग्रिम जमानत अर्जी पर सुनवाई करते हुए दिया है। कोर्ट ने कहा कि अधिकारी हाजिर नहीं होते तो कोर्ट उनके खिलाफ आदेश पारित करने के लिए बाध्य होगी।
विज्ञापन
अदालत। - फोटो : अमर उजाला।
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गो वध अधिनियम के तहत दर्ज प्राथमिकी की विवेचना में लापरवाही पर नाराजगी जाहिर की है। कहा है, पुलिस गो वध को लेकर लापरवाह है। इसका फायदा अपराधियों को मिल रहा है। कोर्ट ने पुलिस कमिश्नर प्रयागराज को तलब करते हुए चार वर्षों में दर्ज एफआईआर और उनकी विवेचना की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है। कोर्ट ने कहा कि 30 नवंबर को पुलिस आयुक्त नहीं आते तो गृह सचिव को पूरे प्रदेश का ब्योरा देने आना होगा।

विज्ञापन


यह आदेश न्यायमूर्ति शेखर कुमार यादव ने प्रयागराज निवासी सैफ अली खान की ओर से दाखिल अग्रिम जमानत अर्जी पर सुनवाई करते हुए दिया है। कोर्ट ने कहा कि अधिकारी हाजिर नहीं होते तो कोर्ट उनके खिलाफ आदेश पारित करने के लिए बाध्य होगी। कोर्ट ने अपर शासकीय अधिवक्ता को यह जानकारी गृह सचिव को उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है।
मामले में याची से डेढ़ क्विंटल गोमांस मिलने का आरोप लगा है। याची ने गिरफ्तारी से बचने के लिए अग्रिम जमानत अर्जी दाखिल की है। कोर्ट ने कहा कि यह मामला 2019 का है लेकिन अभी तक इसकी विवेचना समाप्त नहीं हुई है। आए दिन ऐसे मामले कोर्ट के समक्ष आते हैं, जबकि यूपी में गो हत्या पर प्रतिबंध है।
विज्ञापन


इसके बाद भी गो हत्या की जा रही है और प्राथमिकी दर्ज कराई जा रही है। गो हत्या की विवेचना में पुलिस की ओर से लचीला व्यवहार अपनाया जाता है। विवेचना समय पर समाप्त नहीं की जाती और इसी कारण गो हत्या के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। ऐसा लगता है कि पुलिस इस प्रकार के मामलों में गंभीर नहीं है, जिसका सीधा लाभ अपराधियों को मिल रहा है और उनका मनोबल बढ़ता है।

यूपी सरकार के अधिवक्ता वेदमणि तिवारी की ओर से दलील दी गई कि सरकार की ओर से कड़े निर्देश जारी किए गए हैं। इससे असंतुष्ट कोर्ट ने पुलिस कमिश्नर प्रयागराज को अगली तिथि पर हाजिर होकर वर्ष 2019 से अब तक दर्ज गो हत्या के मामलों की संख्या और उनकी विवेचना की स्थिति बताने को कहा है।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें