याची के अधिवक्ता ने बताया कि याची वर्तमान समय में मिर्जापुर जिले के अहरौरा शाखा में कार्यरत है। घटना के समय वह फतेहपुर में लिपिक के पद पर कार्यरत था। याची एफआईआर में नामजद नही था। याची के अधिवक्ता का कहना था कि फतेहपुर जिलापंचायत अध्यक्ष रेखा सिंह व बैंक आफिसर के हस्ताक्षर से जारी चेक का भुगतान कानपुर में होने के बाद पता चला था कि चेक फर्जी था।
अपर शासकीय अधिवक्ता ने अग्रिम जमानत का विरोध करते हुए बताया कि जिला पंचायत अध्यक्ष के खाते से रेखा सिंह के पद से हटने के बाद भी उनके हस्ताक्षर को कंप्यूटर में डिलीट नही किया गया जिसकी वजह से गलत तरीके से भुगतान हो गया।
याची के अधिवक्ता ने स्पष्ट किया कि कार्य बैंक सर्कुलर के अनुसार किसी का हस्ताक्षर हटाना व जोड़ना लिपिक का कार्य नही है। इसलिए याची निर्दोष है। हाइकोर्ट ने बैंक अधिकारी निर्मल कुमार की सशर्त अग्रिम जमानत मंजूर कर ली।