स्वतंत्रता आंदोलन में छात्रों की भूमिका निर्णायक रही है। युवा भगत सिंह के साथ-साथ उनके विचारों का भी सम्मान करें। नौजवान ही भगत सिंह के असली वारिस हैं। यह बातें बुधवार को शहीद भगत सिंह के पौत्र अभितेज सिंह संधू ने कहीं। छात्र युवा संघर्ष समिति और ऐलान-ए-इकबाल के तत्वाधान में इविवि के निराला सभागार में ‘स्वतंत्रता आंदोलन और छात्र’ विषय पर आयोजित संगोष्ठी हुई। इसमें उन्होंने कहा कि युवाओं को अपने कॅरियर के साथ ही देश के बारे में भी सोचना होगा। भगत सिंह ने व्यवस्था के खिलाफ और इंसानियत के लिए संघर्ष किया था। युवाओं को उनकी विचारधारा को आगे ले जाना होगा।
संगोष्ठी अध्यक्ष प्रो. वल्लभ ने युवाओं से निर्णायक कदम उठाने का आह्वान किया। समिति के प्रांतीय प्रभारी अंजनी कुमार ने कहा कि 1947 के बाद भी स्वतंत्रता की लड़ाई जारी है। इससे पूर्व समिति के सदस्यों ने भगत सिंह के चित्र पर माल्यार्पण कर उनकी चार पीढ़ियों के प्रति सम्मान व्यक्त किया। कार्यक्रम में शिमलाश्री, बृजेश सक्सेना, सर्वेश यादव, डॉ. अल्ताफ हिंदुस्तानी, गोलू सोनकर, रावेन्द्र पांडेय, अजय राव, सुल्ताना हनीफ, आशुतोष ओझा, शुभम मिश्रा, राहुल इंकलाब आदि उपस्थित रहे।