इलाहाबाद विवि छात्रावास परिसर में कुछ इस तरह होली खेलते छात्र।
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आईपीसी की धारा 384, 386, 387, 392, 394
अधिवक्ता हरीशचंद्र दुबे के मुताबिक जबरन चंदा वसूली करना कानूनन जुर्म है। इसके लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 384, 386, 387, 392, 394 के तहत एफआईआर दर्ज हो सकती है। इस गैरजमानती अपराध के लिए दोषी मिलने पर कारावास जिसकी अवधि 10 साल तक की हो सकती है, जुर्माना या फिर दोनों से दंडित किया जा सकता है। होलिका दहन के लिए सहयोग से संसाधन जुटाने की कोशिश करें, जबरन चंदा वसूलने से बचना चाहिए।
आजाद पार्क में होली खेलते छात्र।
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आईपीसी की धारा 323, 352
बैलून बम (पानी भरा गुब्बारा) मारना बच्चों के लिए खेल है, लेकिन जबरन किसी पर रंग भरे गुब्बारों का वार न सिर्फ चोटिल कर सकता है, जिससे उपजने वाला वाद-विवाद कानूनी शिकंजे में कस सकता है। हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता केके सिंह के मुताबिक यदि कोई व्यक्ति जबरन किसी पर पानी से भरे गुब्बारे या कोई ठोस या तरल पदार्थ फेंकता है तो आईपीसी की धारा 323, 352 के तहत मारपीट का केस बन सकता है। इसमें तीन महीने की सजा और जुर्माने का प्रावधान है। लिहाजा, बच्चों के हाथों में पानी भरे गुब्बारे देने से बचें।
बच्चों को न लगाएं जबरन रंग
जिला न्यायालय के डीजीसी (क्रिमिनल) गुलाब चंद्र अग्रहरि बताते हैं कि 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को जबरन रंग न लगाएं। बुरी नीयत से सीक्रेट पार्ट को छूने पर आईपीसी की धारा 323, 504, 506 के साथ ही पॉक्सो अधिनियम के तहत दंडित किया जा सकता है। लिहाजा, होली खेलते समय बच्चों को जबरन रंग न लगाएं।