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होली : कानून से बच कर खेलें होली, वर्ना थाने में होगा जोगीरा सारा रा रा रा...

Sat, 23 Mar 2024 01:53 PM IST
विनोद सिंह सुनील यादव, प्रयागराज

सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट की अधिवक्ता ऊषा किरण बताती हैं कि भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 354 और 509 उन मामलों में लगाते हैं, जहां औरत की मर्यादा और मान-सम्मान को नुकसान पहुंचाया जाता है या जोर-जबरदस्ती की जाती है।
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इलाहाबाद विवि के छात्रावास परिसर में कुछ इस तरह होली खेलते छात्र। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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फागुन की खुमारी में होली रासायनिक रंगाें से ही नहीं, कानून से भी बच कर खेलना है। बुरा न मानो होली है...कह कर जबरन किसी महिला को रंग लगाना जेल की सैर भी करवा सकता है। पानी भरे गुब्बारों का वार, होलिका दहन के लिए जबरन चंदा वसूली और अश्लील गानों पर हुड़दंग करने पर थाने में करना पड़ सकता है जोगीरा सारा रा रा रा...।

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आईपीसी की धारा 354 और 509

इलाहाबाद हाईकोर्ट की अधिवक्ता ऊषा किरण बताती हैं कि भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 354 और 509 उन मामलों में लगाते हैं, जहां औरत की मर्यादा और मान-सम्मान को नुकसान पहुंचाया जाता है या जोर-जबरदस्ती की जाती है। महिलाओं को गलत नीयत या गलत तरीके से छूना, आपत्तिजनक टिप्पणी करना भी इसी में शामिल है। दोषी पाए जाने पर एक साल की कैद, जिसे पांच साल तक बढ़ाया जा सकता है। जुर्माना या दोनों सजा हो सकती है। लिहाजा, अनजान महिला को जोर जबरदस्ती करके रंग न लगाएं। महिलाओं की मर्यादा का ख्याल रखें।

जिला न्यायालय के अधिवक्ता अखिलेश कुमार शर्मा बताते हैं कि सार्वजनिक स्थान या उसके आस पास अश्लील गाना, कथा-गीत या शब्द गाता है या बोलता है तो उसे एक अवधि के लिए कारावास, जिसे तीन महीने तक बढ़ाया जा सकता है, या आर्थिक दंड, या दोनों से दंडित किया जा सकता है। ध्यान रखें होली पर तेज आवाज में अश्लील गानों को न बजाएं और न ही अश्लील डांस करें।

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इलाहाबाद विवि छात्रावास परिसर में कुछ इस तरह होली खेलते छात्र। - फोटो : अमर उजाला
आईपीसी की धारा 384, 386, 387, 392, 394

अधिवक्ता हरीशचंद्र दुबे के मुताबिक जबरन चंदा वसूली करना कानूनन जुर्म है। इसके लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 384, 386, 387, 392, 394 के तहत एफआईआर दर्ज हो सकती है। इस गैरजमानती अपराध के लिए दोषी मिलने पर कारावास जिसकी अवधि 10 साल तक की हो सकती है, जुर्माना या फिर दोनों से दंडित किया जा सकता है। होलिका दहन के लिए सहयोग से संसाधन जुटाने की कोशिश करें, जबरन चंदा वसूलने से बचना चाहिए।
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आजाद पार्क में होली खेलते छात्र। - फोटो : अमर उजाला
आईपीसी की धारा 323, 352

बैलून बम (पानी भरा गुब्बारा) मारना बच्चों के लिए खेल है, लेकिन जबरन किसी पर रंग भरे गुब्बारों का वार न सिर्फ चोटिल कर सकता है, जिससे उपजने वाला वाद-विवाद कानूनी शिकंजे में कस सकता है। हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता केके सिंह के मुताबिक यदि कोई व्यक्ति जबरन किसी पर पानी से भरे गुब्बारे या कोई ठोस या तरल पदार्थ फेंकता है तो आईपीसी की धारा 323, 352 के तहत मारपीट का केस बन सकता है। इसमें तीन महीने की सजा और जुर्माने का प्रावधान है। लिहाजा, बच्चों के हाथों में पानी भरे गुब्बारे देने से बचें।

बच्चों को न लगाएं जबरन रंग

जिला न्यायालय के डीजीसी (क्रिमिनल) गुलाब चंद्र अग्रहरि बताते हैं कि 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को जबरन रंग न लगाएं। बुरी नीयत से सीक्रेट पार्ट को छूने पर आईपीसी की धारा 323, 504, 506 के साथ ही पॉक्सो अधिनियम के तहत दंडित किया जा सकता है। लिहाजा, होली खेलते समय बच्चों को जबरन रंग न लगाएं।
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