2020 के बाद से नहीं बुलाई गई ट्रस्ट की बैठक
न्यास मंडल की बैठक भी मंत्री अपनी हठधर्मिता की वजह से वर्ष 2020 के बाद से नहीं बुला रहे हैं। इतना ही नहीं मंत्री ने हनुमत निकेतन को अपना व्यक्तिगत संस्थान घोषित कर रखा है। इसके अलावा मंदिर के सेवकों और पुजारियों के मानदेय भुगतान के लिए संचालित संयुक्त बैंक खाते को भी अव्यवस्थित कर अवरोध उत्पन्न कर दिया गया है।
ऐसे में मंदिर के संचालन के लिए रिसीवर नियुक्त किया जाना आवश्यक है। याचिकाकर्ता सुशील त्रिपाठी की ओर से अपनी ओर से न्यास के मंत्री पर लगाए गए आरोपों के समर्थन में कई साक्ष्य भी प्रस्तुत किए गए। 20 मार्च को इस मामले की सुनवाई हुई। इसमें साक्ष्यों के परीक्षण और ट्रस्ट डीड के अवलोकन के बाद वहां रिसीवर की नियुक्ति की जरूरत को न्यायोचित ठहराया। एडीजे कोर्ट ने दोनों पक्षों के वकीलों की दलीलों को सुनने के बाद जिलाधिकारी को हनुमत निकेतन का रिसीवर नियुक्त कर दिया। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि अब डीएम ही ट्रस्ट डीड के अनुसार मंदिर का प्रबंधन करेंगे और करवाएंगे।
अभी कोर्ट के आदेश की प्रति मुझे प्राप्त नहीं हुई है। कोर्ट ने ऐसा आदेश दिया है तो उसका पालन कराया जाएगा। - नवनीत सिंह चहल, जिलाधिकारी।