लोहिया इक्के पर लाउडस्पीकर बांधकर प्रचार करते। चुनाव में यह लगने लगा कि इस बार नेहरू के लिए राह आसान नहीं होगी। देश के प्रधानमंत्री को सीधी टक्कर दे रहे लोहिया के समर्थन में बड़े व चर्चित नेता इलाहाबाद पहुंचने लगे।
1962 के लोकसभा चुनाव में पंडित जवाहर लाल नेहरू फूलपुर से हैट्रिक लगाने के लिए उतरे थे। नेहरू पूरे देश में लोकप्रिय थे और उन्हें चुनौती देने के लिए समाजवाद के जनक डॉ. राममनोहर लोहिया ने फूलपुर से चुनाव लड़ने का ऐलान किया। लोहिया उस समय पूरे देश में नए चेहरे के तौर पर उभर रहे थे। डॉ.लोहिया ने चुनाव में संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी की ओर से नामांकन किया और जोश में लबरेज होकर चुनाव लड़ने की शुरुआत की।
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लोहिया इक्के पर लाउडस्पीकर बांधकर प्रचार करते। चुनाव में यह लगने लगा कि इस बार नेहरू के लिए राह आसान नहीं होगी। देश के प्रधानमंत्री को सीधी टक्कर दे रहे लोहिया के समर्थन में बड़े व चर्चित नेता इलाहाबाद पहुंचने लगे।
मधु दंडवते, राजनारायण, जार्ज फर्नांडीज, रामानंद तिवारी व कर्पूरी ठाकुर जैसे देश के सर्वश्रेष्ठ वक्ता व राजनीतिज्ञ फूलपुर में नेहरू की हार व लोहिया की जीत की गुणा-गणित सेट करने लगे। लोहिया के समर्थन में जनसभा और नुक्कड़ सभाएं गांव-गांव होने लगीं। फूलपुर लोकसभा में लोहिया का नाम गूंजने लगा।
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माहौल को भुनाने में लोहिया ने कोई कोर कसर भी नहीं छोड़ी। मतदान का दिन आया और खूब वोट पड़े। गिनती शुरू हुई तो 27 बूथों पर लोहिया ने एकतरफा बढ़त हासिल कर ली। उम्मीद जगी की फूलपुर के इतिहास में समाजवाद का परचम लहराएगा, लेकिन यह सिर्फ अंदाजा ही साबित हुआ। 27 बूथों के अलावा नेहरू ने हर बार की तरह एकतरफा जीत दर्ज की।