याचिका में कहा गया है कि विकास दुबे के घर दबिश देने गई पुलिस टीम के आठ सदस्यों की हत्या की घटना और उसके बाद आरोपी विकास दुबे और उसके साथियों की एनकाउंटर की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
यह भी कहा गया है कि गैंगस्टर दुबे का मकान और अन्य संपत्तियां पुलिस ने किन कानून के तहत ढहा दी, इसकी भी जांच होनी चाहिए। पुलिस गैंगस्टर के परिवार के ऐसेे लोगों को भी परेशान कर रही है, जिनका इस मामले से कोई लेना देना नहीं था। याविका में विकास दुबे के मकान के ध्वस्तीकरण की कार्रवाई को गैरकानूनी बताते हुए कहा गया है कि बिना किसी विधिक आदेश के पुलिस ने मनमाने तरीके से कार्रवाई की।
पूरे मामले में मानवाधिकारों और संविधान के अनुच्छेद 14 व 21 का गंभीर उल्लंघन दिखाई दे रहा है, जिसकी जांच की आवश्यकता है। इससे पहले बार एसोसिएशन के महासचिव प्रभाशंकर मिश्र ने मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिख कर हस्तक्षेप की मांग की थी। अब उन्होंने जनहित याचिका दाखिल की है।