निर्जला एकादशी पर मंगलवार को संगम पर हजारों श्रद्धालुओं ने डुबकी लगाई। इसके साथ ही निर्जल व्रत रखकर भगवान विष्णु और राधा-कृष्ण की सविधि पूजा की गई। संगम पर डुबकी के साथ ही दीपदान और अनुष्ठान भी दिन भर हुए। पंखे के अलावा घड़े का दान किया गया। रेती पर महिलाओं, युवतियों की ओर से जगह-जगह गंगा की पूजा की गई। आरती केदौरान गंगा-यमुना के जयकारे गूंजते रहे।
लॉक डाउन खुलने पर गंगा दशहरा के बाद यह दूसरे स्नान पर्व निर्जला एकादशी पर मंगलवार को संगम पर चहल -पहल बढ़ गई। भोर से ही श्रद्धालु संगम पहुंचने लगे। इस दिन पड़ोसी राज्य मध्य प्रदेश के अलावा पूर्वांचल के कई जिलों के लोग संगम पर डुबकी लगाने के लिए पहुंचे। निर्जला एकादशी स्नान के साथ ही मुंडन और अन्य संस्कार भी हुए। जगह-जगह रेती पर लोगों ने कोरोना महामारी के खात्मे के अलावा मंगल और सुख, शांति की कामना से आहुतियां भी दीं। तीर्थपुरोहित राजेंद्र पालीवाल के मुताबिक निर्जला एकादशी पर संगम पर पुरोहितों की चौकियां खाली नहीं थीं।
इस दौरान सोशल डिस्टेंसिंग का पूरा ध्यान रखा गया। भीमसेनी एकादशी के रूप में विख्यात निर्जला पर भगवान कृष्ण की पूजा की गई। राधा-कृष्ण मंदिरों में पुजारियों ने सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए शृंगार किया। हालांकि अभी मठ-मंदिर न खुलने की वजह से शृंगार झांकी के दर्शन के लिए आम दर्शनार्थियों को मंदिरों में प्रवेश नहीं करने दिया गया। ज्योतिषाचार्य पं ब्रजेंद्र मिश्र के मुताबिक निर्जला एकादशी पर भगवान विष्णु की आराधना का महात्म्य है। इस दिन व्रत रखकर गंगा स्नान और पूजा, ध्यान करने से हर तरह के कष्टों से छुटकारा मिल जाता है। मंगलवार को संगम तट पर घड़े, पंखे का दान करने की लोगों में होड़ मची रही।