सभी पत्रावलियां सीधे वीसी के समक्ष प्रस्तुत करने का निर्देश
पीडीए उपाध्यक्ष ने प्राधिकरण के वित्त नियंत्रक, मुख्य अभियंता, मुख्य नगर नियोजक, विशेष कार्याधिकारी, अधिशासी अभियंता और अन्य प्रभारियों को जारी निर्देश में कहा है कि अब किसी भी स्तर से भेजी जाने वाली पत्रावलियों पर आख्या और संस्तुतियां सीधे उनके समक्ष ही प्रस्तुत की जाएंगी। पहले यह पत्रावलियां सचिव के पास से होकर वीसी तक जाती थीं।
कोई बड़ा मामला नहीं, दफ्तर पहुंचने पर दूंगा जवाब: सचिव
पीडीए सचिव अजीत कुमार सिंह ने आरोपों पर कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया। कहा, इन आरोपों में कोई बड़ी बात नहीं है। मेरी उनसे (उपाध्यक्ष से) बात हो गई है। सब ठीक हो गया है। कल दफ्तर पहुंचने पर बताऊंगा क्या मामला हुआ था।
इसी मामले में है कूटरचना का आरोप
उच्च न्यायालय के समक्ष बाहरी/आंतरिक विकास शुल्क, निरीक्षण और पर्यवेक्षण शुल्क के रूप में स्वीकृत विन्यास योजना, विकास शुल्क, उप शुल्क डिवीजन चार्ज, स्टैकिंग चार्ज और इंपैक्ट शुल्क के खिलाफ अलग-अलग याचिकाएं दाखिल की गई थीं। इस पर विचार करने के बाद सर्वोच्च न्यायालय ने संपूर्ण योजना और अधिनियम 1973 के प्रासंगिक प्रावधानों के तहत विकास शुल्क लगाने को सही ठहराया है।
सुप्रीम कोर्ट ने रेखा रानी के मामले में उच्च न्यायालय के निर्णय को खारिज करते हुए विकास शुल्क की वसूली को अलग करने का आदेश दिया था और बाकी मामलों में प्राधिकरणों की ओर से विकास शुल्क लगाने को सही ठहराया है। इसी आदेश के अनुपालन में पीडीए में प्रचलित पत्रावली में सचिव की ओर से कूटरचित ढंग से उपाध्यक्ष के खिलाफ षड्यंत्र रचने का प्रयास करने की बात कही गई हैै।