PCS Result: 20 साल एयरफोर्स की नौकरी के बाद आरओ (समीक्षा अधिकारी) बन गए, अब दूसरे ही प्रयास में एसडीएम बन गए हैं। पीसीएस की मेरिट में दूसरे स्थान पर रहे प्रयागराज के प्रेम शंकर पांडेय ने सोशल प्लेटफॉर्म यूट्यूब और टेलीग्राम की मदद से परीक्षा की तैयारी की थी।
पहले 20 वर्षों तक एयरफोर्स की नौकरी, इसके बाद सचिवालय में समीक्षा अधिकारी (आरओ) और अब दूसरे ही प्रयास में एसडीएम बन गए। बेली कॉलोनी, प्रयागराज के रहने वाले प्रेम शंकर पांडेय ने पीसीएस की तैयारी के लिए कोई कोचिंग नहीं की।
विज्ञापन
यूट्यूब और टेलीग्राम में उपलब्ध सामग्री की मदद से तैयारी की और दूसरे ही प्रयास में सफलता हासिल कर ली। प्रेम शंकर पांडेय ने इंटरमीडिएट तक की पढ़ाई राजकीय इंटर कॉलेज, प्रयागराज से पूरी की। इसके बाद एयरफोर्स में नौकरी करने लगे।
20 साल नौकरी करने के बाद वर्ष 2021 में रिटायर हुए तो समीक्षा अधिकारी (आरओ)/सहायक समीक्षा अधिकारी (एआरओ) परीक्षा-2021 में शामिल हुए और आरओ के पद पर चयनित हुए। चार-पांच माह पहले ही उन्हें इस पद पर नियुक्ति मिली।
विज्ञापन
उनकी तैनाती सचिवालय, लखनऊ में हैं। प्रेम शंकर पीसीएस-2022 के इंटरव्यू में भी शामिल थे लेकिन चयनित नहीं हो सके थे। इस बार मेरिट में दूसरे स्थान पर हैं। प्रेम शंकर बताते हैं कि एयरफोर्स में नौकरी के दौरान ही उन्होंने कानपुर विश्वविद्यालय से प्राइवेट (व्यक्तिगत) बीए और एमए किया। वह हिंदी माध्यम से पीसीएस परीक्षा में शामिल हुए।
प्रेम शंकर चार भाइयों में तीसरे नंबर के हैं। उनके पिता वशिष्ट नारायण पांडेय बस कंडक्टर के पद से रिटायर हो चुके हैं और मां कृष्णा पांडेय गृहणी हैं। प्रेम शंकर लखनऊ के अर्जुनगंज में अपनी पत्नी और बेटी के साथ रहते हैं। उनकी बेटी कक्षा-तीन में पढ़ती है। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय अपने परिवार वालों को दिया है।
मन से करें पढ़ाईं तो मायने नहीं रखता माध्यम
हिंदी माध्यम से पीसीएस परीक्षा में शामिल हुए प्रेम शंकर पांडेय का कहना है कि मन से पढ़ाई करें तो माध्यम के कोई मायने नहीं रह जाते। हिंदी माध्यम के छात्रों के लिए उनका संदेश है कि माध्यम हिंदी हो या अंग्रेजी, अगर परीक्षा से पहले ही सोच लिया कि हिंदी माध्यम से सफलता मुश्किल है तो आधी ऊर्जा वहीं खत्म हो जाती है।
प्रश्नों का उत्तर लिखते वक्त यह ध्यान रखें कि प्रस्तुतिकरण बेहतर और सरल भाषा में हो। इंटरव्यू में उन्हें किस तरह के सवालों का सामना करना पड़ा, इस पर प्रेम शंकर बताते हैं कि साक्षात्कार के दौरान विभिन्न मुद्दों पर उनकी राय पूछी गई और परिस्थिति आधारित सवाल किए गए।
उनसे पूछा गया था कि एयरफोर्स और प्रशासन के अनुशासन में क्या अंतर है? एयरफोर्स में ऐसी कौन सी व्यवस्था है, जिसे आप प्रशासन में लागू करना चाहेंगे? प्रेम शंकर ने बताया कि पिछली बार के मुकाबले इस बार इंटरव्यू की तकनीक में काफी बदलाव दिखा।