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इलाहाबाद विश्वविद्यालय में पहली बार हुआ ऑनलाइन वाइवा

Thu, 25 Jun 2020 07:18 PM IST
अमर उजाला लोकल ब्यूरो अमर उजाला ब्यूरो, प्रयागराज

सार

  • इविवि में पहली बार हुआ ऑनलाइन वाइवा
  • ओपन ऑनलाइन वाइवा से अन्य लोगों को भी जोड़े जाने की सुविधा
  • बाह्य परीक्षकों ने घर बैठे पूछे सवाल, अब समय से मिल सकेगी उपाधि
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विस्तार
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इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) ने कोविड-19 के मद्देनजर पीएचडी छात्रों का ऑनलाइन वाइवा शुरू करा दिया गया है। अब तक तीन विभाग ऑनलाइन वाइवा करा चुके हैं। खास यह कि इस ओपेन ऑनलाइन वाइवा से अन्य लोगों को भी जोड़े जाने की सुविधा है। इससे संबंधित विषय के छात्रों एवं शोधार्थियों को काफी फायदा होगा। ऑनलाइन वाइवा शुरू होने से शोधार्थियों को अब समय से पीएचडी की उपाधि मिल सकेगी। लॉकडाउन के कारण इविवि में परीक्षाएं, प्रैक्टिकल, वाइवा आदि का आयोजन नहीं कराया जा सका।

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पिछले दिनों इविवि परीक्षा समिति की बैठक में निर्णय लिया गया कि इस साल शोधार्थियों का वाइवा ऑनलाइन कराया जाएगा। ऑनलाइन वाइवा का प्रस्ताव परीक्षा नियंत्रक प्रो. रामेंद्र कुमार सिंह ने रखा था। उनके प्रस्ताव के आधार पर परीक्षा समिति में ऑनलाइन वाइवा कराए जाने पर सहमति बनने के बाद शिक्षाशास्त्र, जंतु विज्ञान और रसायन विज्ञान विभाग में शोधार्थियों का ऑनलाइन वाइवा कराया गया। बृहस्पतिवार को रसायन विज्ञान विभाग में ऑनलाइन वाइवा आयोजित किया गया, जिसमें प्रो. रामेंद्र कुमार सिंह आंतरिक परीक्षक के रूप में शामिल हुए जबकि बाह्य परीक्षक घर बैठे ऑनलाइन संबंधित शोधार्थी से सवाल पूछ रहे थे।

प्रो. रामेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि उनकी पीएचडी की एक पूर्व छात्रा भी बहरामपुर, उड़ीसा से इस ऑनलाइन वाइवा से जुड़ी। वह पोस्ट डॉक्टोरल कर रही है। ऑनलाइन वाइवा जूम एप के माध्यम से कराया जा रहा है। इस ऑनलाइन ओपन वाइवा से कोई अन्य व्यक्ति भी जुड़कर इसे देख और सुन सकता है, जबकि ऑफलाइन वाइवा में यह सुविधा नहीं थी। लेकिन, इसके लिए संबंधित व्यक्ति को लिंक उपलब्ध कराया जाएगा। ऑनलाइन वाइवा के बाद बाह्य परीक्षक की हस्ताक्षर युक्त स्कैन कॉपी पर आंतरिक परीक्षक के हस्ताक्षर होंगे और इसके बाद कॉपी इविवि प्रशासन के पास भेज दी जाएगी। ऑनलाइन वाइवा शुरू होने से खर्च में बचत होगी, वाइवा भी समय से पूरा कराया जाए सकेगा और शोधार्थियों को पीएचडी की उपाधि के लिए ज्यादा इंतजार भी नहीं करना होगा।

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