वकील की दलील
आर्थिक तंगी के चलते पैरवी के अभाव में दस साल से जेल में बंद आरोपी की ओर से अधिवक्ता संजय कुमार यादव ने हाईकोर्ट में जमानत अर्जी दाखिल की। दलील दी कि दस साल बाद भी एक भी गवाही नहीं हो सकी है और गवाही शीघ्र पूरी होने की संभावना नहीं है, पहले ही आर्थिक तंगी और पैरवी के अभाव में आरोपी दस साल से जेल में निरुद्ध है। किसी भी मुल्जिम को अनंतकाल के लिए जेल में नहीं रखा जा सकता।
निचली अदालत के रिकॉर्ड से हाईकोर्ट हैरान
जमानत अर्जी पर अदालत में पेश निचली अदालत के रिकॉर्ड के मुताबिक वर्ष 2013 में एफआईआर दर्ज होने के बाद मार्च 2014 में निचली अदालत ने आरोपी की जमानत खारिज कर दी। आर्थिक तंगी के चलते वह हाईकोर्ट का दरवाजा न खटखटा सका। इस बीच 16 गवाहों की सूची के साथ पुलिस ने निचली अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया, लेकिन दस साल बीत जाने के बाद आजतक गवाही शुरू नहीं हो सकी। इससे भी ज्यादा कोर्ट तब हैरान हुई जब पता चला कि निचली अदालत ने वर्षों से न्यायिक हिरासत में जेल में बंद आरोपी के खिलाफ गैर जमानती वारंट भी जारी कर रखा है।
विधिक सहायता में विफल प्राधिकरण
हाईकोर्ट ने आरोपी को दस वर्षों में विधिक सहायता न प्रदान किए जाने को राज्य विधिक सहायता प्राधिकरण की विफलता करार देते हुए इसकी भी जांच का आदेश दिया है।