याचियों के अधिवक्ता ने बताया कि याचियों की उक्त भूमि का अधिग्रहण भूमि अधिग्रहण अधिनियम-1894 की धारा 17(1)(4) के तहत किया गया था। किसानों ने 11 सितंबर 2008 और 30 सितंबर 2009 की भूमि अधिग्रहण की अधिसूचनाओं को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने किसानों की याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद किसानों ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
सुप्रीम कोर्ट ने 11 सितंबर 2008 और 30 सितंबर 2009 की अधिसूचनाओं को रद्द कर दिया। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को प्रक्रिया का पालन करते हुए दोबारा भूमि अधिग्रहण करने की स्वतंत्रता दी थी। लेकिन दुबारा कोई अधिसूचना जारी नही हुई, इसलिए राजस्व अभिलेखों से नोएडा अथॉरिटी का नाम हटा कर पुनः किसानों का नाम दर्ज किया जाना चाहिए। ।
हाई कोर्ट ने याचिका स्वीकार करते गौतम बुद्ध नगर प्रशासन को राजस्व अभिलेखों से नोएडा का नाम हटाने और किसानों की भूमि पर उनका नाम चार सप्ताह चढ़ाने का आदेश दे दिया है। साथ ही कोर्ट ने कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए नोएडा और जिला प्रशासन भूमि अधिग्रहण करने की स्वतंत्रता भी प्रदान की है। फिलहाल जब तक भूमि अधिग्रह की कोई नई अधिसूचना जारी नहीं होती रही तब तक राजस्व अभिलेखों में किसानों का नाम दर्ज रहेगा।