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NCZCC : गंगा दशहरा पर भोजपुरी गायक गोपाल ने सुरों के जादू से बांधा समां, नन्हें कलाकारों ने भी दिखाई प्रतिभा

Sun, 16 Jun 2024 08:17 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

गंगा दशहरा के अवसर पर सांस्कृति मंत्रालय और उत्तर मध्य सांस्कृतिक केंद्र की ओर से विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। कलाकारों ने अपने सुरों और प्रतिभा से लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया। 
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एनसीजेडसीसी में कार्यक्रम प्रस्तुत करते नन्हें कलाकार। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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संगम के तट अरैल घाट पर उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र और संस्कृति मंत्रालय की ओर से आयोजित तीन दिवसीय गंगा दशहरा उत्सव में रविवार को भोजपुरी गायक गोपाल राय के सुरों का जादू छाया रहा। राय को सरों में डूबते- उतराते रहे। सुर सम्राट ने शुरूआती निशा को यागदार जो बना दिया। मइया ज्ञान के डगरिया बुझात नइखे, विनइला निर्मल पानी, जै गंगा महरानी, सब लोग जात बा नहाए चल गंगा। बहिहे फिर से होइके चंगा अविरल गंगा। निर्मल गंगा को जब उन्होंने अपनी खनकती आवाज में जब इन भजनों के शब्द फूटे तो लोगों की तालियों की गड़गड़ाहट से समूचा वातावरण गूंज उठा।

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इसके बाद अवधी लोकगायक धीरज पांडे ने तन के तमूरे में जय सिया राम-राम, जग में सुंदर हैं दो नाम, चाहे कृष्ण कहो या राम तथा जय हो बजरंग बली- जय हो बजरंग बली और एक से बढ़कर लोकगीत की प्रस्तुति पूरे वातावरण को भक्तिरस में सराबोर कर दिया। इसके बाद लखनऊ से पधारी सिजा राय ने कथक नृत्य नाटिका प्रस्तुत कर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम का शुभारम्भ मुख्य अतिथि गुरु माता संत करुणामई जी ने दीप प्रज्ज्वलित करके किया l

संगत कलाकारों में कीबोर्ड पर निहाल चतुर्वेदी, बेंजो पर रंजीत कुमार, ढोलक पर मैन चन्द्र, तबला पर जितेंद्र कुमार एवं एक्टोपैड पर प्रशांत मिश्रा ने साथ दिया। इस अवसर पर केंद्र निदेशक प्रो. सुरेश शर्मा,समस्त अधिकारी, कर्मचारी सहित काफी संख्या में भक्तगण उपस्थित रहे।

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बाल कलाकारों ने भी दिखाई प्रतिभा

30 दिवसीय प्रस्तुति परक बाल नाट्य कार्यशाला का समापन अवसर पर रविवार को बाल कलाकारों ने अपने हुनर से हर किसी का ध्यान खींचा। सांस्कृतिक केंद्र परिसर में प्रशिक्षित बच्चों द्वारा सुन्दर लाल छाबड़ा के निर्देशन में थियेटर इन एजुकेशन के माध्यम से नाटक नन्हें नकलची का हास्यपूर्ण मंचन किया। नाटक में दिखाया गया है कि दूसरों की नकल करना यानी मिमिक्री करना एक हद तक सही भी है क्योंकि इससे देखने वालों को मजा आने के साथ-साथ, जिसकी नकल की जा रही है वो अगर सामने भी होता है तो उसको मजा ही आता है, लेकिन जब यही नकल दूसरों को तंग करने के लिए किया जाए तो ठीक नहीं है।

इसी के साथ अरुणा शेट्टी के निर्देशन में नाटक ट्रिन-ट्रिन का भी मंचन किया गया। वर्तमान में मोबाइल की समस्या को इस नाटक के माध्यम से बच्चों ने एक ज्वलंत प्रश्न खड़ा किया। छोटा हो, बड़ा हो, बूढ़ा हो, जवान हो, गरीब हो, अमीर हो, शहर का हो या गांव का फोन सबके पास है हम चाह कर भी इससे दूर नहीं जा सकते। मोबाइल पहले हमारी जरूरत थी अब आदत बन गई है। इस नाटक में सभी बाल कलाकारों ने अभिनय से दर्शकों का मन मोह लिया। इस मौके पर केंद्र निदेशक प्रो.सुरेश शर्मा ने मुख्य अतिथि सुषमा शर्मा को तुलसी का पौधा व अंगवस्त्र भेंट किया तथा प्रशिक्षकों को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया। कार्यक्रम का संचालन हिमानी रावत ने किया। इस अवसर पर केंद्र के अधिकारी, कर्मचारी सहित काफी संख्या में दर्शक मौजूद रहे।
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