वर्तमान में कालिंदी का नंबर प्रयागराज से 14723 एवं भिवानी से 14724 है, जबकि एक दिसंबर से इसका प्रयागराज से नंबर 14117 एवं भिवानी से 14118 हो जाएगा। इसी क्रम में प्रयागराज संगम-सहारनपुर नौचंदी एक्सप्रेस और प्रयागराज संगम-चंडीगढ़ ऊंचाहार एक्सप्रेस में भी एलएचबी रेक इसी वित्तीय वर्ष में लग जाएगा। वर्तमान समय नौचंदी में आईसीएफ के 23 एवं ऊंचाहार एक्सप्रेस में आईसीएफ के 24 कोच लगे हुए हैं। फिलहाल उत्तर रेलवे के लखनऊ मंडल ने इन दोनों ही ट्रेनों में एलएचबी रेक लगाए जाने की अनुमति दे दी है। रेक मिलते ही दोनों ट्रेनों में एलएचबी रेक लगा दिया जाएगा। दोनों ही ट्रेनों 22-22 कोच की रहेंगी।
एलएचबी रेक की खासियत
एलएचबी कोच यात्रियों के लिए काफी आरामदायक होता है। दुर्घटना की स्थिति में ये कोच कम क्षतिग्रस्त होते हैं और यात्रियों के सुरक्षित रहने की संभावना बढ़ जाती है। राजधानी, शताब्दी और दुरंतो समेत तमाम महत्वपूर्ण ट्रेनों में एलएचबी रेक ही लगे हुए हैं। इसके स्लीपर और एसी के सभी कैटेगरी के कोच में बर्थ की संख्या ज्यादा होती है। आईसीएफ (इंटीग्रल कोच फैक्ट्री) के मुकाबले इनकी लंबाई ज्यादा रहती है। आईसीएफ कोच में एयर ब्रेक का प्रयोग होता है। इस वजह से ब्रेक लगाने पर ट्रेन काफी दूर जाकर रुकती है। जबकि, एलएचबी कोच में डिस्क ब्रेक का प्रयोग होता है। ब्रेक लगाने पर कुछ ही दूरी पर ट्रेन रुक जाती है। एचएचबी रैक को अधिकतम 180 किमी प्रतिघंटे की रफ्तार से दौड़ सकती है।
एलएचबी और आईसीएफ में बर्थ संख्या
एलएचबी
स्लीपर- 80
थर्ड एसी- 72
सेकंड एसी- 58
फर्स्ट एसी- 22-24
आईसीएफ
स्लीपर- 72
थर्ड एसी- 64
सेकंड एसी- 46
फर्स्ट एसी- 18