सीबीआई टीम ने शनिवार को मठ स्थित गेस्ट हाउस के उस कमरे का बाहर से निरीक्षण किया, जिसमें नरेंद गिरि ने फांसी लगाकर खुदकुशी की थी। टीम ने इस कमरे में आने और जाने वाले दरवाजों की वीडियोग्राफी भी कराई। इसी कमरे में क्राइम सीन को रीक्रिएट किया जाएगा। क्राइम सीन रीक्रिएट करने से पहले इस मामले में से जुड़े सभी सेवादारों से पल पल की जानकारी मांगी गई।
सीबीआई टीम मठ पहुंचने के बाद सीधे उस कमरे के बाहर गई। कमरे को जांच के बाद पुलिस ने सील कर दिया था। फिलहाल सील नहीं तोड़ा गया, लेकिन कमरे में कितने दरवाजे और खिड़कियां हैं, कमरे में मुख्य दरवाजे के अलावा और कौन सा दरवाजा था, जिससे इंट्री की जा सकती है, सबकी वीडियोग्राफी कराई गई।
तीनों को साथ बिठाकर पूछताछ की
पुलिस महंत के उस कमरे में भी गई जहां वह रहते थे। सेवादारों सर्वेश उर्फ बबलू को लेकर टीम दोबारा उस कमरे के पास गई। बाद में बबलू और सुमित से पूछा कि उसे कैसे पता चला था कि महंत ने फांसी लगा ली है? उन्होंने दरवाजा तोड़ने का निर्णय क्यों किया? महंत को फंदे से उतारते समय सेवादार धनंजय भी आ गया था। तीनों से सीबीआई ने उस दिन के पल पल की जानकारी मांगी। पहले तीनों को साथ बिठाकर पूछताछ की गई फिर उनसे अलग अलग भी पूछताछ हुई।
सीबीआई ने जब्त कर लिया सेवादार के मोबाइल
सीबीआई ने पूछताछ की रिकार्डिंग भी की। सर्वेश, सुमित और धनंजय के अलावा एक और सेवादार के मोबाइल भी सीबीआई ने जब्त कर लिया था। मठ प्रशासन से जुड़े अन्य सेवादारों से भी पुलिस ने पूछताछ की। सीबीआई इसी कमरे में क्राइम सीन रीक्रिएट करेगी। रीक्रिएशन से पहले सेवादारों से पूरी जानकारी ली गई। सूचना के बाद जो पुलिसकर्मी पहले पहुंचे थे। उनसे भी बात की जाएगी।
‘जब अंदर से कोई उत्तर नहीं नहीं मिला तो तोड़ा दरवाजा’
सेवादार सर्वेश उर्फ बबलू, सुमित और धनंजय ने सीबीआई टीम को बताया कि बड़े महाराज प्रतिदिन 12:30 पर खाना खाकर आराम करने जाते थे। करीब तीन बजे वह चाय पीते थे। घटना वाले दिन उन्होंने चाय के लिए पहले ही मना कर दिया था। शाम को पांच बजे उन्हें फोन किया गया, लेकिन फोन बंद था। तब हम लोग गेस्ट हाउस के कमरे में गए। कई बार दरवाजा खटखटाया, लेकिन अंदर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली तो घबराहट में दरवाजा धक्का देकर सिटकिनी तोड़ दी। शायद बड़े महाराज जीवित हों, इसकी संभावना को देखते हुए फंदा काटकर उन्हें नीचे उतारा।