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मुस्लिम पक्ष बोला: शाही ईदगाह 400 सालों से है, विवादित ढांचा घोषित करने की मांग दंड के साथ खारिज की जानी चाहिए

Thu, 03 Apr 2025 06:24 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट में मुस्लिम पक्ष ने हिंदू पक्ष की शाही ईदगाह मस्जिद को विवादित ढांचा घोषित करने की मांग को लेकर दाखिल अर्जी का विरोध में आपत्ति दाखिल की। कहा, कि शाही ईदगाह चार सौ सालों से स्थित है।
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शाही ईदगाह मस्जिद - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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इलाहाबाद हाईकोर्ट में मुस्लिम पक्ष ने हिंदू पक्ष की शाही ईदगाह मस्जिद को विवादित ढांचा घोषित करने की मांग को लेकर दाखिल अर्जी का विरोध में आपत्ति दाखिल की। कहा, कि शाही ईदगाह चार सौ सालों से स्थित है। इसे विवादित ढांचा घोषित करने की मांग कठोर दंड के साथ खारिज किया जाना चाहिए। हिंदू पक्ष की ओर से आपत्ति पर लिखित जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगने पर न्यायालय ने छह मई की तिथि लगा दी है। न्यायामूर्ति राम मनोहर नारायण मिश्र की एकल पीठ मामले की सुनवाई कर रही है।

श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति न्यास के अध्यक्ष महेंद्र प्रताप सिंह ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में शाही ईदगाह को विवादित ढांचा घोषित करने की मांगा में अर्जी दाखिल की है। उनकी मांग थी कि अयोध्या केस की सुनवाई के दौरान बाबरी मस्जिद को विवादित ढांचा घोषित किया गया था, उसी तरह शाही ईदगाह को भी विवादित ढांचा घोषित किया जाए।

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मुस्लिम पक्ष की ओर अधिवक्ता तस्नीम अहमदी, नसीरउज्जमा व तनवीर अहमद ने आपत्ति दाखिल करते हुए दलील दी कि वादी ने अपनी याचिका, आवेदन, हलफनामे आदि में उक्त मस्जिद को शाही ईदगाह मस्जिद लिखा है। किसी गुप्त उद्देश्य के लिए उक्त मांग की जा रही है। यह अर्जी प्रक्रिया का दुरुपयोग है। इसे कठोर दंड के साथ खारिज किया जाना चाहिए।

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बिना राधा अधूरे हैं श्याम, राधा-रानी को बनाया जाए पक्षकार : हिंदू पक्ष

इलाहाबाद हाईकोर्ट में अधिवक्ता रीना एन सिंह नेक्स्ड फ्रेंड वाद मित्र के रूप में राधा रानी को पक्षकार बनाने के लिए प्रार्थना पत्र दाखिल की है। उन्होंने कोर्ट में दलील दी कि राधा के बिना श्याम अधूरे हैं। भगवान श्रीकृष्ण इस मुकदमे के मुख्य वादी हैं। संपत्ति उनकी है। संपूर्ण बृज मंडल व पूरे विश्व में भगवान श्रीकृष्ण बिना राधा रानी के अपूर्ण माने जाते हैं। भगवान श्री कृष्ण की सभी संपत्तियों में निहित माना जाएगा। ऐसे में राधा रानी को प्रस्तुत वाद में शामिल करना आवश्यक है।

वहीं, श्रीकृष्ण जन्मभूमि ट्रस्ट के अधिवक्ता हरेराम त्रिपाठी ने राधा रानी को पक्षकार बनाए जाने का विरोध किया। दलील दी कि भगवान श्री कृष्ण लला विराजमान अवयस्क हैं। नाबालिग विग्रह के रूप में हैं। सारी संपत्ति उनकी है। ट्रस्ट के माध्यम से रिकॉर्ड पर उन्हीं के नाम से दर्ज है। भगवान के नाबालिग होने के नाते वादी भगवान श्रीकृष्ण विग्रह की किसी भी प्रकार से पत्नी रूप में किसी की परिकल्पना नहीं की जा सकती।

वाद विचाराधीन है, इसलिए बिना किसी हितधारक के किसी को भी पक्षाकार न बनाया जाए। मुस्लिम पक्ष ने कहा कि मुझे राधा रानी को पक्षकार बनाने पर कोई आपत्ति नहीं है। बस यह आवेदन कानूनी प्रावधान से स्वीकार्य है या नहीं। छह मई को न्यायालय में आगे होगी सुनवाई। शूट नंबर 7 में दिसंबर 2023 में यह प्रार्थना पत्र दाखिल की थी।

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