माघ मेला में स्नान की कई तिथियां एक साथ पड़ जाने से प्रशासन की चुनौती बढ़ गई है। खास यह कि दो सबसे बडे़ स्नान पर्व एक साथ पड़ गए हैं। मकर संक्रांति 14 और 15 जनवरी को है तो अगले दिन 16 जनवरी को मौनी अमावस्या का स्नान होगा। ऐसे में इन पर्वों पर स्नानार्थियों में भीड़ का अनुमान है, जो बसंत पंचमी तक बनी रहेगी।
इस बार माघ मेला तकरीबन 10 दिन पहले शुरू हो जाएगा। पौष पूर्णिमा पहला स्नान दो जनवरी को है। हालांकि, आखिरी स्नान महाशिवरात्री का 13 फरवरी को है लेकिन कल्पवासियों के लिए आखिरी स्नान 31 जनवरी को माघी पूर्णिमा का है। इस तरह से दो से 31 जनवरी के बीच तीन और स्नान पड़ेंगे। इनमें 14 और 15 को मकर संक्रांति का स्नान है। 16 जनवरी को मौनी अमावस्या है। इसके बाद 22 जनवरी को बसंत पंचमी का स्नान है। माघ मेला में मौनी अमास्था और मकर संक्रांति सबसे बड़ा स्नान पर्व है और इन अवसरों पर देश के हर कोने से श्रद्धालु आते हैं।
ऐेसे में इन तीन तारीखों में माघ मेला क्षेत्र के साथ शहर में भी जबरदस्त भीड़ होगी। इसके अलावा मौनी अमावस्था को आने वाले ज्यादातर श्रद्धालु बसंत पंचमी का स्नान करके जाते हैं। ऐसे में 14 से 22 जनवरी के बीच आने वाली भीड़ को नियंत्रित करना प्रशासन के लिए चुनौती होगी। मेला प्रशासन को कुल डेढ़ करोड़ स्नानार्थियों के आने की उम्मीद है। डीएम सुहास एलवाई का कहना है कि 14 से 16 जनवरी के बीच सबसे अधिक भीड़ होगी। इसके लिए अलग से तैयारी की जा रही है। सुरक्षा व्यवस्था 10गुना रहेगी। लोगों के भीड़ वाले, पार्किंग आदि पर विशेष चौकसी के साथ तकनीकी का भी सहारा लिया जाएगा। भूले-बिसरे शिविर में भी आधुनिक तकनीकी का इस्तेमाल होगा।
माघ मेला में आने वाले कल्पवासियों के लिए राशन की मांग उठने लगी है। श्रद्धालुओं को इस बार भी राशन नहीं मिलने की उम्मीद है। अमर उजाला में इस बाबत प्रमुखता से छपी खबर को संज्ञान में लेते हुए प्रयाग धर्म संघ की ओर से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद समेत अन्य स्थानीय मंत्रियों को पत्र लिखा गया है।
माघ मेला में पहले कल्पवासियों तथा अन्य श्रद्धालुओं को आटा, चावल, चीनी और मिट्टी का तेल मिलता था। इसके लिए मेला क्षेत्र में राशन की दुकानें खोली जाती थीं और सस्ते दर पर ये वस्तुएं दी जाती थीं। इनमें से चीनी का वितरण पहले बंद कर दिया गया। विगत कुछ वर्षों से आटा और चावल का वितरण भी बंद है। ऐसे में कल्पवासियों को राशन आदि व्यवस्था खुद करनी पड़ती है। सरकार की गंभीरता को देखते हुए इस बार राशन मिलने की उम्मीद की जा रही थी। इसके मद्देनजर खाद्य रसद विभाग की ओर से गेहूं और चावल की मांग भी की गई। इसके अलावा जिला प्रशासन की ओर से 98 हजार के बजाय पांच लाख लीटर मिट्टी तेल की मांग की गई लेकिन शासन से कोई जवाब नहीं आया। अफसरों का कहना है कि कई वर्षों से राशन नहीं मिल रहा है। इसलिए इस बार भी राशन नहीं मिलने जा रहा।
कल्पवासियों की इस समस्या को अमर उजाला के सोमवार के अंक प्रमुखता से उठाया गया। इसकी प्रति लगाते हुए प्रयाग धर्म संघ ने मुख्यमंत्री तथा अन्य मंत्रियों को पत्र लिखकर राशन की मांग की है। संघ के अध्यक्ष राजेंद्र पालीवाल का कहना है कि मेला क्षेत्र में ही आटा, चावल आदि मिलने से कल्पवासियों को सहूलियत होती थी लेकिन अब उन्हें घर से इन वस्तुओं को लाना पड़ता है। उन्होंने मांग की है कि मानक के अनुरूप कल्पवासियों के लिए राशन की व्यवस्था की जाए। ताकि, उन्हें इन वस्तुओं के लिए भटकना न पड़े और वे अपना पूरा समय धार्मिक कृत्य में लगा सकें। पत्र की प्रति उन्होंने मंडलायुक्त और डीएम को भी भेजी है।