माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी बोर्ड) की फर्जी वेबसाइट तैयार कर मार्कशीट और डिग्री बेचने के मामले में कई अहम खुलासे हुए हैं। इस गिरोह ने कानपुर, लखनऊ, जौनपुर समेत कई शहरों में करीब सात हजार फर्जी डिग्रियां जारी कर दी थीं।
माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी बोर्ड) की फर्जी वेबसाइट तैयार कर मार्कशीट और डिग्री बेचने के मामले में कई अहम खुलासे हुए हैं। इस गिरोह ने कानपुर, लखनऊ, जौनपुर समेत कई शहरों में करीब सात हजार फर्जी डिग्रियां जारी कर दी थीं। हैरानी की बात यह है कि ये डिग्रियां यूपी समेत अन्य राज्यों के नामी विश्वविद्यालयों के नाम पर तैयार की गई थीं।
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जांच में पता चला कि गिरोह सुनियोजित तरीके से काम कर रहा था। सोशल मीडिया और एजेंट के जरिये छात्रों को कम समय में डिग्री दिलाने का लालच दिया जाता था। इसके बदले मोटी रकम वसूली जाती थी। बिना परीक्षा दिए ही बी-फार्मा, डी-फार्मा आदि की डिग्रियां उपलब्ध करा दी जाती थीं। पुलिस जांच में सामने आया कि इन नकली डिग्रियों का इस्तेमाल कई लोगों ने नौकरी पाने और मेडिकल स्टोर खोलने में भी किया।
सभी एजुकेशन सेंटर का सत्यापन कर रही पुलिस की टीम
पुलिस के मुताबिक, आजमगढ़ के एक बी-फार्मा कॉलेज के संचालक शशि प्रकाश राय का कानपुर, जौनपुर, लखनऊ, मेरठ, वाराणसी समेत यूपी के कई शहरों के 60-70 एजुकेशन सेंटर से संपर्क था। पुलिस की एक टीम सभी एजुकेशन सेंटर का सत्यापन करने में जुट गई है।
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कोलकाता समेत अन्य राज्यों में दबिश
पुलिस जांच में पता चला कि फर्जी डिग्री देने वालों के गिरोह का नेटवर्क यूपी के अलावा हिमाचल प्रदेश, पश्चिम बंगाल से लेकर कई अन्य राज्यों तक फैला है। मामले में कई और शातिरों के नाम सामने आने पर पुलिस टीम ने कोलकाता समेत अन्य राज्यों में दबिश दी है। वहीं, डीसीपी कुलदीप सिंह गुनावत ने बताया कि मुख्य आरोपी के संपर्क में कई लोग थे, जिन्हें पकड़ने के लिए पुलिस लगातार दबिश दे रही है। जल्द ही और लोगों की गिरफ्तारी हो सकती है।