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MNNIT : कैंसर कोशिकाओं की पहचान करके कीमोथेरेपी के खतरे घटाएगा लचीला एंडोस्कोप, शोधार्थी ने तैयार किया मॉडल

Fri, 12 Jul 2024 07:52 PM IST
विनोद सिंह आकाश शर्मा, अमर उजाला, प्रयागराज

सार

इस पेरिस्टाल्टिक एंडोस्कोप का मॉडल गणित विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर प्रमोद कुमार यादव के मार्गदर्शन में शोधार्थी मुहम्मद रोशन ने तैयार किया है। रोशन यहां मैथेमेटिकल साइंस के बॉयो फ्ल्यूड मैकेनिक्स विषय के शोधार्थी हैं।
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एमएनएनआईटी के एसोसिएट प्रोफेसर प्रमोद कुमार यादव के साथ शोधार्थी मुहम्मद रोशन। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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मोतीलाल नेहरू राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एमएनएनआईटी) ने अंगों की अंदरूनी जांच के उपकरण (एंडोस्कोप) का ऐसा गणितीय मॉडल तैयार किया है, जो कैंसर कोशिकाओं की न सिर्फ नजदीक से पहचान करेगा, बल्कि चुनिंदा कोशिकाओं तक ही जरूरी दवाइयां भेजेगा। इससे कीमोथेरेपी के दुष्प्रभाव घटेंगे। चाइनीज जर्नल ऑफ फिजिक्स में शोध पत्र छपने के बाद शोधार्थियों को इटली में सितंबर में होने जा रही डॉक्टरों की अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस में आमंत्रित किया गया है।
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इस पेरिस्टाल्टिक एंडोस्कोप का मॉडल गणित विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर प्रमोद कुमार यादव के मार्गदर्शन में शोधार्थी मुहम्मद रोशन ने तैयार किया है। रोशन यहां मैथेमेटिकल साइंस के बॉयो फ्ल्यूड मैकेनिक्स विषय के शोधार्थी हैं। वह बताते हैं कि गणितीय मॉडल के अनुरूप डिजाइन किए जाने वाले एंडोस्कोप से शरीर में कैंसर से संक्रमित अंग के अंदर बेहद नजदीक तक जा पाना संभव होगा।

कारण इस एंडोस्कोप का बेहद लचीला होना है। अभी तक चिकित्सा क्षेत्र में उपयोग में आ रहे एंडोस्कोप लचीले नहीं हैं। इसी कारण वह दूर से ही कैंसर कोशिकाओं की पहचान करने की कोशिश करते हैं। इससे डॉक्टरों को किसी सटीक निष्कर्ष तक पहुंचने में दिक्कत होती है। कई बार यह भ्रम भी बना रहता है कि अंग के अंदर कैंसर कोशिकाएं अभी हैं या खत्म हो गईं।
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शोधार्थी के मार्गदर्शक प्रमोद कुमार यादव बताते हैं कि अप्रैल अंक में प्रकाशित शोध पत्र में बताया है कि इस एंडोस्कोप के वॉल्व लचीले होने से स्वस्थ कोशिकाओं को बचाते हुए कैंसरग्रस्त कोशिकाओं तक दवाओं को पहुंचाना संभव होगा। इससे कीमोथेरेपी के नुकसान घटेंगे। जांच सटीक होगी तो डॉक्टरों को ऑपरेशन के दौरान चीरा भी छोटा लगाना होगा। घाव ठीक भी जल्दी होगा।
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आगे का जिम्मा बायोमेडिकल इंजीनियरिंग का

गणितीय मॉडल के अनुरूप वास्तविक एंडोस्कोप को डिजाइन करके उसे उपयोग लायक बनाने का जिम्मा अब बायो मेडिकल इंजीनियरों का है। रोशन बताते हैं कि शोध पत्र प्रकाशित होने के बाद देश-विदेश से लोग उन्हें संपर्क करके लेक्चर देने के लिए आमंत्रित कर रहे हैं। इटली में सितंबर में प्रस्तावित डॉक्टरों की अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस में भी मॉडल पर चर्चा के लिए उन्हें बुलाया गया है।
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