एके निगम ने कोर्ट को बताया कि किस प्रकार से उन्होंने पूरे मामले की विवेचना शुरू की, किस प्रकार उन्होंने गवाहों को परीक्षण किया, किस प्रकार उन्होंने कृपाशंकर पांडे और राजेश यादव को एग्जामिन किया। जिसमें उन लोगों ने इन्वेस्टिगेटिव ऑफिसर को बताया था कि किस प्रकार महेंद्र मिश्रा उसके रिश्तेदारों जानने वालों और विजय मिश्रा ने साजिश करके कैबिनेट मंत्री पर जानलेवा हमला कराया। जिसमें संयोगवश मंत्री जी बच गए। लेकिन एक पत्रकार और एक सुरक्षाकर्मी की मौत हो गई थी। मंत्री समेत 6 लोग घायल हुए थे। एके निगम ने साजिश की गुत्थी कोर्ट के सामने खोली। उन्होंने कोर्ट के सामने राजेश यादव के बयानों का खुलासा किया।
विजय मिश्रा की तरफ से 22 जनवरी को अपनी मौजूदगी में गवाही कराने की बात कही गई थी, लेकिन वे आज नहीं आए। गाइडलाइन के अनुसार कोर्ट ने एके निगम की गवाही कराई। हर हफ्ते केस की सुनवाई हो इस पर हाईकोर्ट का आदेश है। कोतवाली को दो बार माल मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया जा चुका है।
इसके बाद भी आज भी कोतवाली पुलिस ने माल मुकदमा कोर्ट में पेश नहीं किया। जिसकी वजह से एके निगम की गवाही अधूरी रह गई। 4 फरवरी अगली डेट है। कोर्ट ने कोतवाली पुलिस को आदेश दिया कि अगली डेट पर माल मुकदमा जरूर पेश करें। अधिवक्ता जेपी शर्मा ने बताया कि जल्द ही गवाही मुकम्मल होकर शुरू हो जाएगी। तीन महीने में मुकदमे का फैसला आ सकता है। एके निगम ने कृपाशंकर व राजेश यादव को एग्जामिन किया था। राजेश यादव ने उन्हें अपने बयान में बताया था कि पूरी साजिश में दिलीप मिश्रा और इसके साथ शामिल थे।
तत्कालीन एसएचओ कोतवाली व फर्स्ट इन्वेस्टिगेटिव ऑफिस एके निगम ने आज कोर्ट को बताया कि घटना के बाद वे मौके पर गए थे। कंप्लेन में 3 लोगों का नाम था। दिलीप मिश्रा, कृपा शंकर पांडे और राजेश यादव। राजेश यादव ने जांच के दौरान यह माना था और गवाही दी थी कि महेंद्र मिश्रा, ज्ञानपुर विधायक विजय मिश्रा और दिलीप मिश्रा ने साजिश के तहत घटना को अंजाम दिया। राजेश पायलट महेश मिश्रा का ड्राइवर था। महेंद्र ने राजेश पायलट को कैबिनेट मंत्री पर हमले की जिम्मेदारी सौंपी थी। दिलीप मिश्रा ने महेंद्र मिश्रा से कहा था कि नंदी की वजह से उनका राजनीतिक कैरियर चौपट हो गया है। इस इसलिए इस काम को पूरा कराओ।