यह था मामला
राजू पाल हत्याकांड में अन्य आरोपियों के साथ साथ माफिया अतीक अहमद और अशरफ़ के साथ ही गुलफूल उर्फ़ रफ़ीक को भी आरोपी बनाया गया था, लेकिन सुनवाई के दौरान ही प्रयागराज में हिरासत में अतीक अहमद और अशरफ़ की हत्या हो जाने और गुल फूल की मौत हो जाने के चलते तीनो के ख़िलाफ़ चल रही कार्यवाही को कोर्ट ने समाप्त कर दिया था।कोर्ट में राजू पाल की पत्नी और मामले की वादिनी पूजा पाल के वकील प्रांशु अग्रवाल ने बताया कि 25 जनवरी, 2005 को इलाहाबाद पश्चिमी से बसपा विधायक राजू पाल की दिन-दहाड़े गोलीबारी में हत्या कर दी गई थी।
इस गोलीबारी में देवी पाल व संदीप यादव की भी मौत हुई थी। जबकि दो लोग गंभीर रुप से घायल हुए थे। पूजा पाल ने थाना धुमनगंज में इस हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराकर बताया था कि शाम के लगभग तीन बजे उसके पति राजूपाल बसपा विधायक अपने साथीयो के साथ घर आ रहे थे कि अमित दीप मारुति एजेंसी के पास लगभग सात आठ लोगो ने राजू पाल की गाड़ी रोक ली और आरोपी अशरफ़ ने गोली मारकर राजू की हत्या कर दी।
माफिया अतीक पर लगा था हत्या करवाने का आरोप
इस गोलीबारी में देवी लाल यादव और संदीप यादव की भी मौत हो गई वहीं दो अन्य लोग भी घायल हो गये थे। आरोप था कि लगाया गया था की सांसद अतीक अहमद ने अपने भाई अशरफ उर्फ खालिद आदिम और साथीयो से राजू पाल की हत्या करवा दिया है। इस रिपोर्ट में वादिनी ने आरोप लगाकर बताया कि उसके पति अक्सर उसे बताया करते थे की अतीक अहमद और उसका भाई किसी दिन उनकी हत्या करवा देगा। पूर्व में भी तीन बार राजूपाल पर जानलेवा हमला किया था।
पूजा पाल ने बताया कि राजू पाल ने तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव और शिवपाल सिंह यादव से अपनी सुरक्षा के लिए गुहार लगाई थी लेकिन राजू पाल को पूरी सुरक्षा नहीं दी गई वहीं इस हत्या के बाद पूजा पाल को भी रिपोर्ट दर्ज ना कराने के लिए धमकियाँ भी दी गई। रिपोर्ट दर्ज करने के बाद छःह अप्रैल, 2005 को प्रयागराज पुलिस ने इस हत्याकांड मामले की विवेचना की और उसके बाद अतीक व अशरफ समेत कुल 11 आरोपीयो के खिलाफ आरोप पत्र कोर्ट में दाखिल किया था।
22 जनवरी 2016 को सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई को सौंप दी थी जांच
12 दिसंबर, 2008 को इस मामले की जांच सीबीसीआईडी को सौंप दी गई।10 जनवरी, 2009 को सीबीसीआईडी ने पांच अभियुक्तों के खिलाफ अपना पहला पूरक आरोप पत्र दाखिल किया। जिसमें मुस्तकिल, मुस्लिम उर्फ गुड्डू, गुलहसन, दिनेश पासी व नफीस कालिया को आरोप बनाया गया था। चार अप्रैल 2009 को सीबीसीआईडी ने अपनी दूसरा पूरक आरोप पत्र दाखिल किया। इसमें सिर्फ गुफरान को आरोपी बनाया गया था।
24 दिसंबर, 2009 को सीबीसीआईडी ने तीसरा पूरक आरोप पत्र दाखिल किया। इसमें अब्दुल कवि को आरोपी बनाया गया था।इनमें अशरफ व अतीक के अलावा रंजीत पाल, आबिद, फरहान अहमद, इसरार अहमद, जावेद, गुलफुल उर्फ रफीक अहमद, गुलहसन व अब्दुलकवि को आरोपी बनाया था।
22 जनवरी, 2016 को सुप्रीम कोर्ट ने पूजा पाल की इस हत्याकांड की त्वरित और निष्पक्ष विवेचना कराये जाने की माँग वाली याचिका पर इस मामले की जांच सीबीआई को सौंपी थी ।जिसपर सीबीआई ने 8 अप्रैल 2016 को मामला दर्ज कर विवेचना शुरू की,और विवेचना के बाद हत्या,हत्या का प्रयास, साज़िश रचने और बलवा करने के आरोपो में 10 आरोपीयो ख़ालिद अज़ीम उर्फ़ अशरफ़,अतीक अहमद,रणजीत पाल, जावेद, फरहान,आबिद,इसरार अहमद,गुलफूल उर्फ़ रफ़ीक, गुल हसन और अब्दुल कवि के खिलाफ चार्जशीट दायर की थी।