पूर्व डीआईओएस और वर्तमान डीडीआर की पत्नी यहां तैनात
प्रयागराज में डीआईओएस रहे व वर्तमान डीडीआर आरएन विश्वकर्मा की पत्नी प्रतिभा विश्वकर्मा हिंदी की सहायक अध्यापक हैं। वह नियमित उपस्थित रही हैं, लेकिन पढ़ने वाले ही यहां पर नहीं हैं। यहां पर हिंदी की तीन शिक्षिकाएं हैं, लेकिन माैजूद एक ही रहती हैं। विद्यालय के रिकॉर्ड में करीब तीन साै बच्चे पंजीकृत हैं, लेकिन पढ़ने तो करीब 30 ही आते हैं। शिक्षकों ने बताया कि यहां पर मुस्लिम बच्चे ज्यादा हैं। इस दाैरान मोहर्रम चल रहा है, इसलिए अधिकतर नहीं आ रहे हैं।
हाजिरी लगाने आती हैं पूर्व लेखाकार की बहन व भयाहू
संयुक्त शिक्षा निदेशक कार्यालय में लेखाकार रहे संजय सक्सेना की बहन संध्या और उनके भाई की पत्नी प्रीति यहां पर हिंदी की सहायक अध्यापक हैं। यह दोनों केवल हाजिरी लगाने विद्यालय जाती हैं। ऐसे ही गणित के शिक्षक अब्दुल जाकिर खान भी कभी-कभी हाजिरी लगाने आते हैं। वर्षों से यही सिलसिला चल रहा है। शिक्षकों के इस रवैये से काैन अभिभावक अपने बच्चे वहां पर पढ़ने के लिए भेजे? विद्यालय में पढ़ाई का माहाैल शिक्षक बनाएंगे न कि बच्चे। फिर यह शिक्षक कहते हैं कि बच्चे नहीं आते हैं।
उर्दू के शिक्षक हैं, बच्चे नहीं
मुस्लिम आबादी के नजदीक वाले इस विद्यालय में उर्दू पढ़ाने के लिए शिक्षक मोहम्मद हसन की तैनाती है। उनको शिक्षण कार्य का 18 वर्ष का अनुभव है, लेकिन वह पढ़ाते नहीं। क्योंकि, विद्यालय में उर्दू पढ़ने वाला कोई बच्चा ही नहीं है। ऐसे में कभी-कभी उनका मन हुआ तो स्कूल चले आते हैं। मन न हुआ तो नहीं भी आते हैं। फिलहाल, वेतन में कटाैती बर्दाश्त नहीं।
काष्ठ कला और पुस्तक कला की पढ़ाई में ख्याति
अंग्रेजी हुकूमत में शुरू हुआ ईसाई अल्पसंख्यक वर्ग का यह विद्यालय कभी काष्ठ कला और पुस्तक कला की पढ़ाई के प्रसिद्ध था। अब इन दोनों विषयों की पढ़ाई यहां पर नहीं होती है। यहां पर उस दाैर की केवल बिल्डिंग बची है, शिक्षण का हुनर तो विलुप्त हो गया।
यहां के विद्यार्थी रहे न्यायमूर्ति वीएन खरे
शिक्षकों ने बताया कि भारत के मुख्य न्यायाधीश रहे न्यायमूर्ति वीएन खरे यहां के विद्यार्थी रहे। इंडिया टीम के खिलाड़ी रहे मोहम्मद कैफ ने यहां से हाईस्कूल तक की पढ़ाई की थी। लेकिन, पिछले दो दशक से इस विद्यालय की स्थिति खराब हो गई है।
दिनभर सुअर विचरण करती हैं
स्कूल परिसर में चारों तरफ सुअरों का जमावड़ा है। शिक्षकों ने नगर निगम को कई बार पत्र लिखा, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। परिसर में गंदगी है और दीवार टूटी है। स्कूल के समय बकरियां और गाय भी मैदान में डटी रहती हैं।
विद्यालय में बच्चों की संख्या में गिरावट आई है। अभी प्रवेश प्रक्रिया चल रही है। इस सत्र के लिए पांच अगस्त तक हाईस्कूल व इंटर में प्रवेश लिया जाएगा। कुछ पारिवारिक समस्याओं के चलते मैं कुछ दिनों से अवकाश पर हूं। - मोहम्मद शाहिद, प्रधानाचार्य