दिवाकर विक्रम ने भाजपा से मांगा था टिकट
चतुर-सुजान राजनीतिज्ञ के जाने बाद उनके परिवार के सदस्य राजनीतिक जमीन तलाश रहे हैं। वीपी सिंह के बेटे अजय सिंह ने 2009 में फतेहपुर से जन मोर्चा पार्टी से चुनाव लड़ा लेकिन हार गए। वह चुनाव नहीं लड़ रहे हैं...विपक्षियों की इस अफवाह को खारिज करने में अजय असफल रहे। नतीजा यह रहा कि उनके वोट सपा के राकेश सचान झटक ले गए। उन्हें बहुत ही कम मत मिले थे।
अजय के बाद अब वीपी सिंह के भाई कुंवर हरिबक्श सिंह के पोते दिवाकर विक्रम सिंह हाथ-पांव मार रहे हैं। बकौल दिवाकर, क्षेत्र पिछड़ा हुआ है। लोगों को उनसे बड़ी उम्मीदें हैं। वर्ष 2019 में तैयारी पूरी न होने कारण चुनाव नहीं लड़ा। इस बार उन्होंने भाजपा से टिकट भी मांगा था। फिलहाल, राजनीतिक पार्टियों को भी मांडा स्टेट से कोई लाभ नजर नहीं आता। इसलिए दूरी बना रखी है।
तो ऐसे बने थे वीपी मुख्यमंत्री
वीपी सिंह के करीबी रहे मांडा के पूर्व ब्लॉक प्रमुख मंगल देव द्विवेदी बताते हैं कि सन् अस्सी में कांग्रेस विधायक दल का नेता चुनने के लिए संजय गांधी ने वीपी सिंह, धर्मवीर और जगदीश टाइटलर को स्पेशल प्लेन से उत्तर प्रदेश भेजा था। धर्मवीर ने प्रस्ताव रखा कि संजय गांधी को मुख्यमंत्री बनाया जाए। प्रस्ताव अनुमोदित होने के बाद तीनों नेता दिल्ली पहुंचे। धर्मवीर एक माला लेकर गए थे।
संजय गांधी को फैसला मालूम चल गया था। फिर भी उन्होंने पूछा कि किसे चुना। धर्मवीर ने बताया कि विधायकों ने आपको मुख्यमंत्री के रूप में चुना है। संजय ने कतार में पीछे खड़े वीपी सिंह को बुलाया और कहा कि इसी प्लेन से वापस जाइए। राज्यपाल से कहिए कि शपथ की तैयारी करें। आप (वीपी सिंह) मुख्यमंत्री होंगे।