उनका कहना था कि लोक संस्कृति की मिठास की तुलना किसी ने नहीं की जा सकती। ऐसे में कजरी, चैैती, बिरहा, आल्हा और कव्वाली जैसी विधाओं के संरक्षण पर ठोस काम किया जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि पहली बार 1989 में शादी के कुछ दिन बाद ही वह इसी शहर में आई थीं। तब उनके पति आईएएस अफसर अवनीश अवस्थी की पहली तैनाती इसी शहर में हुई थी। पति के साथ जार्ज टाउन में रहने और यहां की संस्कृति से जुड़ने, जीने का उन्हें भरपूर अवसर मिला।
मालिनी ने पुराने संस्मरणों को भी साझा करते हुए इस शहर की संस्कृति को रेखांकित किया। बताया कि शादी के बाद पहली बार जब वह अपने पति के साथ संगम पर नाव से गंगा दर्शन के लिए जा रही थीं, तब किसी बच्चे के मुंडन के लिए आए एक परिवार की महिलाओं ने उनके पांव की ताजी महावर देखकर पूछा था कि बिटिया हाल में ही शादी हुई है क्या? हां में सिर हिलाने पर उसी नाव पर उस परिवार की महिलाओं ने फिर से उनके पांव में महावर रचाकर मां गंगा से उनके लिए प्रार्थना की थी। उनका कहना था कि प्रयागराज शहर नहीं एक सुंदर संस्कृति है। इसे जितनी गहराई में उतर कर जिएंगे, उतना ही सुख मिलेगा।