इसके अलावा याची के खिलाफ कोई साक्ष्य नहीं है। घटना के समय वह शहर से दूर हरिद्वार में था। उसे जार्जटाउन एसएचओ के द्वारा फोन पर घटना की जानकारी दी गई। याची के अधिवक्ता ने तर्क दिया कि खुदकुशी नोट में कटिंग है और अगस्त 2021 में दिवंगत हो चुके संत का भी नाम आया है और नोट मृतक महंत के द्वारा नहीं लिखा गया है। झूठे आरोप में याची 22 सितंबर से ही नैनी सेंट्रल जेल में बंद हैं। सीबीआई की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता ज्ञान प्रकाश व संजय यादव ने बहस की।
इस पर कोर्ट ने सीबीआई का पक्ष जानना चाहा। सीबीआई के अधिवक्ताओं ने तर्क दिया कि मामले में दिल्ली की टीम जांच कर रही है। उन्हें जवाब दाखिल करने के लिए छह हफ्ते का समय दिया जाए। लेकिन, याची के अधिवक्ताओं ने इसका विरोध किया। कहा कि मामला स्थानीय है और सीबीआई को इतना वक्त नहीं दिया जाना चाहिए। इस कोर्ट पर ने तीन हफ्ते में सीबीआई को जवाब देने का आदेश दिया। सीबीआई के अधिवक्ता संजय यादव ने बताया कि मामले की अगली सुनवाई 20 दिसंबर को होगी।