प्रयागराज आगमन पर महामंडलेश्वर यतींद्र आनंद जी महाराज का राष्ट्रीय सनातन सेना के पदाधिकारियों द्वारा शाल पहनाकर स्वागत किया गया। इस अवसर पर यतींद्र आनंद महाराज ने राष्ट्रीय सनातन सेना के पदाधिकारियों को अपना आशीर्वाद प्रदान किया। उन्होंने कहा कि प्रयागराज का गौरव हमारे वेद और पुराणों में है। माघ के महीने में प्रयागराज तीर्थ में समस्त देवी देवता आकर यहां समस्त साधु, सन्यासी एवं यहां के निवासियों को तथा यहां गंगा जी में स्नान करने वाले भक्तों को अपना आशीर्वाद प्रदान करते हैं।
उन्होंने कहा कि प्रयागराज में सरकार को पंचकोसी परिक्रमा को विकसित करना चाहिए। इसके अतिरिक्त प्रयागराज जिस नाम से जाना जाते हैं यहां पर 12 माधव का वास है, इसलिए सरकार को यह चाहिए कि माघ मेला के समय इन 12 माधव तीर्थों को विकसित करे और माघ मेला से इन समस्त माधव को जोड़ने का काम करे, जिससे भक्तजन आसानी से इन 12 माधव के दर्शन एवं पुण्य लाभ प्राप्त कर सकें।
कहा की प्रयागराज में किले के अंदर बहुत सारे तीर्थ हैं। उन समस्त तीर्थों को दर्शन के लिए सरकार को भक्तों के लिए सरल सुविधा कर देनी चाहिए, इसके अतिरिक्त प्रयागराज किला के अंदर स्थित अक्षयवट के दर्शन के लिए सरकार को भक्तों के लिए सरलता से खोल देना चाहिए, जिससे कोई भी भक्त अक्षय वट एवं किले के अंदर स्थित समस्त तीर्थों के दर्शन के पुण्य लाभ प्राप्त कर सके।
कहा कि प्रयागराज राजनीतिक दृष्टि से भी जाना जाता है। हमारे देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू का जन्म स्थान प्रयागराज है। उनके जन्म स्थान को समाधि स्थल सरकार को बनाना चाहिए, जिससे कि प्रयागराज भारतवर्ष या विदेशों से आने वाले भक्त यह जानकारी प्राप्त कर सकें कि पंडित जवाहरलाल नेहरू का मूल स्थान कहां है और उनकी समाधि कहां है। सरकार यदि उसे समाधि स्थल नहीं बनाती तो कांग्रेस को चाहिए की भारतवर्ष के प्रथम प्रधानमंत्री जी के जन्म स्थान को समाधि स्थल बनाए।
इस अवसर पर राष्ट्रीय सेना थल सेना के संरक्षक अभय नारायण पांडेय, राष्ट्रीय अध्यक्ष मनोज दुबे ,राष्ट्रीय सचिव एवं प्रवक्ता राजेंद्र कुमार त्रिपाठी,अमर त्रिपाठी, बलराम दुबे, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हीरामणि त्रिपाठी ,गौरव द्विवेदी, धनंजयत्रिपाठी, राजेश गौड़, अरविंद विश्वकर्मा, संतोष पांडे ,शिव शंकर सिंह, राजेश शर्मा आदि उपस्थित रहे।