दावेदारी में जुटे नेता
पूर्व विधायक अनुग्रह नारायण सिंह को फूलपुर सीट से कांग्रेस की ओर से मजबूत दावेदार माना जा रहा था, लेकिन अब यह सीट सपा के खाते में हैं। ऐसे में उनके इलाहाबाद सीट चुनाव लड़ने की भी चर्चा है। इनके अलावा युवा नेता प्रदेश महासचिव विवेकानंद पाठक, प्रदेश महासचिव मुकुंद तिवारी, विजय मिश्रा, पूर्व जिलाध्यक्ष, डॉ.सत्या पांडेय ने भी दावेदारी की है। इनके नाम भी पार्टी शीर्ष नेतृत्व को भेजे जा चुके हैं। विजय मिश्रा पार्टी टिकट पर पूर्व में महापौर का चुना लड़ चुके हैं और तीसरे स्थान पर रहे।
वह दूसरे स्थान पर रहे सपा उम्मीदवार विनोद मिश्रा से बहुत पीछे नहीं रहे थे। वहीं विवेकानंद की छात्र राजनीति से ही जुझारू नेता के तौर पर पहचान रही है। इसके अलावा विवेकानंद को प्रियंका गांधी का नजदीकी भी माना जाता है। डॉ.सत्या पांडेय महिला कांग्रेस की प्रदेश उपाध्यक्ष हैं तो अनिल द्विवेदी पदों पर रहते हुए संगठन में लंबे समय संघर्ष के साक्षी रहे हैं। मुकुंद तिवारी भी संगठन में कई प्रमुद पदों पर रहने के साथ दो बार पार्षद रह चुके हैं। वर्तमान में उनकी पत्नी पार्षद हैं तो मां भी दो बार पार्षद रह चुकी हैं। इन्हीं संघर्षों और अलग-अलग समीकरणों का हवाला देते हुए नेता गठबंधन से टिकट के लिए दावेदारी में जुटे हैं।
राहुल-प्रियंका ने बुलाया तो कांग्रेस करुंगा ज्वाइन: सलीम शेरवानी
प्रयागराज। पूर्व सांसद सलीम शेरवानी के सपा में पद छोड़ने के साथ कांग्रेस में शामिल होने की चर्चा तेज हो गई है। इरशाद उल्ला, मोहम्मत एजाज, मोहम्मद अनीस आदि कांग्रेस नेताओं ने बुधवार को सलीम से मुलाकात करने के साथ उनसे कांग्रेस में शामिल होने की अपील भी की। वहीं सलीम शेरवानी का कहना है कि गांधी परिवार से उनके अच्छे संबंध रहे हैं। राहुल और प्रियंका गांधी उन्हें बुलाते हैं तो वह कांग्रेस जरूर ज्वाइन करेंगे। ऐसे में सलीम शेरवानी की इस टिप्पणी के बाद उनके कांग्रेस में शामिल होने के साथ इलाहाबाद सीट से दावेदारी की भी चर्चा तेज हो गई है।
फूलपुर सीट के लिए कोशिश में हैं कई नेता
कई वरिष्ठ नेता अब भी इलाहाबाद के बजाय फूलपुर सीट कांग्रेस को दिए जाने की कवायद में जुटे हैं। उनका तर्क है कि यह पूर्व प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू की सीट है। इसके अलावा राहुल गांधी की न्याय यात्रा भी इस सीट की चार विधानसभा क्षेत्रों फूलपुर, उत्तरी, फाफामऊ और सोरांव से गुजरी थी। इसके विपरीत इलाहाबाद सीट की एक भी विधानसभा यात्रा के रास्ते में नहीं पड़ी थी।