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लोकसभा चुनाव : विजेता-उपविजेता को छोड़ अन्य प्रत्याशी नहीं बचा पाए जमानत

Wed, 27 Mar 2024 06:57 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

फूलपुर लोकसभा सीट पर कुल 18 बार चुनाव हुए हैं। इनमें सिर्फ सात बार तीन या अधिक प्रत्याशियों की जमानत बच पाई। 1999 के चुनाव में सपा विजयी रही तो बीजेपी, बीएसपी और अपना दल के उम्मीदवार जमानत बचाने में सफल रहे। शेष 11 चुनाव में विजेता और उपविजेता की जमानत बची।
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विस्तार
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लोकसभा चुनाव में तीसरे स्थान पर रहने वाले ज्यादातर प्रत्याशी अपनी जमानत तक नहीं बचा पाए। चुनाव दो प्रमुख दलों के बीच ही सिमटकर रह गए। खास यह कि जमानत न बचा पाने वालों में भाजपा, बसपा, कांग्रेस के उम्मीदवार भी शामिल हैं। सिर्फ 1999 के लोकसभा चुनाव में प्रयागराज की दोनों सीट पर चार-चार उम्मीदवार अपनी जमानत बचा पाने में सफल रहे हैं।

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फूलपुर लोकसभा सीट पर कुल 18 बार चुनाव हुए हैं। इनमें सिर्फ सात बार तीन या अधिक प्रत्याशियों की जमानत बच पाई। 1999 के चुनाव में सपा विजयी रही तो बीजेपी, बीएसपी और अपना दल के उम्मीदवार जमानत बचाने में सफल रहे। शेष 11 चुनाव में विजेता और उपविजेता की जमानत बची।

कमोवेश यही स्थिति इलाहाबाद सीट पर भी है। इलाहाबाद सीट के लिए भी कुल 18 बार चुनाव हुए और इनमें आठ मौके ऐसे आए जब तीन या अधिक प्रत्याशी जमानत बचा पाए। इस सीट पर भी 1999 के चुनाव में चार प्रत्याशी जमानत बचाने में सफल रहे थे। यानि, इस सीट पर भी 10 बार दो प्रत्याशियों के बीच आमने-सामने की लड़ाई हुई। शेष जमानत नहीं बता पाए।

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कांग्रेस के सामने है जमानत बचाने की चुनौती

कांग्रेस उम्मीदवार लगातार चुनावों में जमानत नहीं बचा पाए। फूलपुर सीट पर 91 के बाद से कांग्रेस उम्मीदवार की जमानत नहीं बची। इलाहाबाद सीट पर भी 1991 के बाद से कांग्रेस उम्मीदवार लगातार पीछे रहे। 89 के बाद सिर्फ 1999 में कांग्रेस प्रत्याशी की जमानत बची थी। इसके बाद लगातार जमानत जब्त होती रही।

सपा जमानत बचाने में रही है सफल

दोनों सीटों पर जमानत बचाने को लेकर सपा की स्थिति सबसे मजबूत रही है। सपा उम्मीदवार हर चुनाव में जमानत बचाने में सफल रहे हैं। ज्यादातर चुनाव में सपा प्रत्याशी विजेता या उप विजेता रहे हैं। या फिर प्रत्याशी हीं नहीं उतारा गया।

आयोग की प्रत्याशियों के वाहन पर रहेगी नजर

निर्वाचन आयोग की राजनीतिक दलों के नेताओं तथा प्रत्याशियों के काफिले में चलने वाले वाहनों पर भी नजर रहेगी। प्रत्याशियों को खुद के वाहन के लिए भी अनुमति लेनी होगी। इसके अलावा वाहनों पर होने वाला खर्च प्रत्याशियों के खाते में जुड़ेगा।

चुनाव आयोग की तरफ से आचार संहिता को लेकर गाइडलाइन जारी की जा रही है। दावेदार अभी से काफिले में घूम रहे हैं। ऐसे में वाहनों पर विशेष नजर रखने की रणनीति बनाई गई है।

हालांकि प्रत्याशियों को अपने काफिले में अधिकतम कितने वाहन शामिल कर सकते हैं इसकी कोई पाबंदी नहीं है। प्रत्याशी चाहे जितने वाहन शामिल कर सकते हैं, लेकिन हर सभी के लिए अनुमति लेनी होगी। उप जिला निर्वाचन अधिकारी पूजा मिश्रा ने बताया कि इन वाहनों का खर्च प्रत्याशियों के खाते में जुड़ेगा। हर तरह के वाहन के लिए किराया भी तय किए गए हैं। बिना अनुमति प्रचार या काफिले में वाहन शामिल करने पर आचार संहिता का उल्लंघन माना जाएगा।
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मतदान कर्मियों का प्रशिक्षण अप्रैल के दूसरे सप्ताह में

लोकसभा चुनाव में करीब 26 हजार कर्मचारियों की जरूरत होगी। इनकी ड्यूटी लगाई जा रही है। साथ ही मोबाइल पर मैसेज के माध्यम से इन्हें सूचित किया जा रहा है। इसी क्रम में अब प्रशिक्षण की तैयारी है। मतदान कर्मियों की अप्रैल महीने के दूसरे सप्ताह में प्रशिक्षण प्रस्तावित है।

हालांकि, अभी तारीख तय नहीं हुई है। इससे पहले मास्टर ट्रेनर प्रशिक्षित किए जाएंगे जो अन्य कर्मचारियों को प्रशिक्षण देंगे। मतदान कर्मियों को पारिश्रमिक का भुगतान ऑनलाइन किया जाएगा। इसके लिए सभी विभागों से कर्मचारियों के खाते से संबंधित तथा अन्य विवरण निर्धारित फार्मेट में मांगे गए हैं।
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