न्यायालय ने कहा कि आरोपी चाकू दिखाकर दबाव बनाना चाहता था। उसका इरादा शारीरिक चोट पहुंचाना था, हत्या करना नहीं। अन्यथा वह चाकू से एक नहीं कई वार करता। आरोपी ने उकसावे में आकर एक ही वार किया जो घातक साबित हुआ।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 24 साल पहले 50 रुपये के विवाद में हुई हत्या के मामले में मिली उम्रकैद को 10 साल की सजा में तब्दील कर दिया है। यह फैसला न्यायमूर्ति मोहम्मद अजहर हुसैन इदरीसी व न्यायमूर्ति राजीव गुप्ता की खंडपीठ ने कानपुर नगर के सलीम उर्फ सांभा की याचिका पर दिया।
विज्ञापन
न्यायालय ने कहा कि आरोपी चाकू दिखाकर दबाव बनाना चाहता था। उसका इरादा शारीरिक चोट पहुंचाना था, हत्या करना नहीं। अन्यथा वह चाकू से एक नहीं कई वार करता। आरोपी ने उकसावे में आकर एक ही वार किया जो घातक साबित हुआ। इस लिए यह मामला हत्या का नहीं बल्कि गैर इरादतन हत्या की श्रेणी में आएगा।
कानपुर नगर के थाना घाटमपुर में 17 जनवरी 2001 को हत्या सहित अन्य धाराओं में याची पर मुकदमा दर्ज कराया गया। आरोप था कि याची और अजीज संयुक्त रूप से एक व्यवसाय कर रहे थे। इस दौरान 50 रुपये के लेनदेन को लेकर दोनों के बीच विवाद हो गया। इसी के चलते याची सलीम ने चाकू से वार कर अजीज की हत्या कर दी।
विज्ञापन
मामले में ट्रायल कोर्ट ने 18 मई 2005 को सलीम को हत्या का दोषी पाते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। इसे उसने हाईकोर्ट में चुनौती दी। हाईकोर्ट ने रिकॉर्ड पर उपलब्ध साक्ष्यों व दलीलों को सुनने के बाद याचिका को आंशिक रूप से स्वीकार कर लिया। कोर्ट ने उम्रकैद को 10 साल की सजा में बदल दिया।