भूमि आवंटन पर मचे घमासान के बीच बुधवार को खाक चौक की दो घंटे तक मान-मनौव्वल चली। अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि महाराज ने खास चौक व्यवस्था समिति के संतों के साथ लंबा विचार-विमर्श किया। खाक चौक के संतों का कहना था कि संगम लोवर मार्ग की पूर्वी पटरी महावीर मार्ग से दक्षिण की जमीन जहां बची है, वहीं उनको बसाया जाए। उनकी पारंपरिक जमीन इस बार गंगा की कटान की आड़ में छीनने की कोशिश की जा रही है। ऐसा हुआ तो टकराव होना तय है। अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष ने कहा कि खाक चौक को कुंभ मेला के हृदय स्थल के रूप में बसाया जाएगा। वह इस मसले पर खाक चौक के साथ हैं और रहेंगे।
बाघंबरीगद्दी मठ में शाम छह बजे शुरू हुई बैठक में अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष के साथ खाक चौक के महामंडलेश्वरों, महंतों और खालसों के पीठाधीश्वरों ने हिस्सा लिया। खाक चौक व्यवस्था समिति के अध्यक्ष महंत सीताराम दास महात्यागी का कहना था कि भूमि आवंटन में उनके साथ अन्याय किया जा रहा है। खासलों की जमीन दूसरों के नाम आवंटित करने की साजिश की जा रही है। इसे रोका जाना चाहिए। समिति के महामंत्री महामंडलेश्वर संतोष दास सतुआ बाबा ने बताया कि गंगा में कटान के बाद भी महावीर मार्ग के दक्षिण व सेक्टर 17 में संगम लोवर मार्ग की पूर्वी पटरी की जमीन बची है।
इसके अलावा मुक्ति मार्ग की पूर्वी और पश्चिमी पटरी भी खाक चौक की ही है, वहीं उनके शिविर लगने चाहिए। अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि ने इस प्रकरण पर कुंभ मेलाधिकारी विजय किरन आनंद से फोन पर बात की। परिषद के अध्यक्ष ने अमर उजाला को बताया कि कुंभमेलाधिकारी का कहना है कि संगम लोवर मार्ग पर प्रमुख आध्यात्मिक संस्थाएं बस रही हैं। इस वजह से दिक्कतें हैं। परिषद के अध्यक्ष का कहना है कि खाक चौक कुंभ का हृदय है और उनके लिए आध्यात्मिक संस्थाएं नहीं खालसे ही प्रमुख हैं। इसलिए खाक चौक का पूरा सम्मान किया जाना चाहिए। इस मसले पर फिर 25 नवंबर को बैठक होगी। कुंभ में खाक चौक के 140 महामंडेश्वरों समेत 270 संतों के शिविर लगेंगे।