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रणनीति को जमीन पर उतारने कल से जुटेगा विहिप, मंदिर के साथ केंद्र में सरकार के लिए होगा प्रयास

Wed, 06 Feb 2019 02:43 PM IST
दुष्यंत शर्मा पंकज प्रसून, अमर उजाला, प्रयागराज
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विहिप - फोटो : अमर उजाला
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धर्म संसद में मंदिर मुद्दे को लेकर पारित प्रस्ताव को घर-घर का मुद्दा बनाने और चुनावी माहौल को भगवा रंग देने में विश्व हिंदू परिषद जुट गया है। मंदिर और चुनाव को एक साथ लेकर किस तरह से लोगों के बीच पहुंंचना है, इसके लिए सात और आठ फरवरी को विहिप कार्यकर्ताओं का फिर से कुंभ क्षेत्र में जमावड़ा हो रहा है।

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चौंकाने वाली बात यह है कि संघ और विहिप की अभी तक की कवायद में सबसे ज्यादा फोकस पूर्वी उत्तर प्रदेश पर किया जा रहा है। इसकी सबसे बड़ी वजह सपा-बसपा का गठबंधन है जिसे भाजपा और उससे जुड़े सभी हिंदू संगठन अंदर से हल्के में बिल्कुल नहीं ले रहे है। ऊपर से यह जरूर कहा जा रहा है कि इस गठबंधन का कोई असर नहीं पड़ेगा।

कुंभ क्षेत्र में होने वाले दो दिनों के कार्यकर्ता सम्मेलन में बुंदेलखंड से लेकर गोरखपुर के गांव-गांव से विहिप कार्यकर्ताओं की टीम यहां पहुंचने वाली है। बताया जा रहा है कि पूर्वी क्षेत्र के चारों प्रांतों से जुड़े विहिप कार्यकर्ताओं की टीम बनाई जाएगी। गांव-गांव और घर-घर की जिम्मेदारियां भी बांटी जाएंगी।

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2000 कार्यकर्ता जुटेंगे

सम्मेलन से दो दिन पहले ही मंगलवार को विहिप के केंद्रीय उपाध्यक्ष चंपत राय ने संघ भवन में बैठकर पूरे कार्यक्रम की रूपरेखा पर चर्चा की। इसी सम्मेलन में 6 अप्रैल से अयोध्या में मंदिर निर्माण को लेकर शुरू किए जाने वाले राम नाम के जनजागरण के लिए भी गली-मोहल्ले तक की टीम का गठन होगा। राष्ट्रीय उपाध्यक्ष चंपत राय के अलावा विहिप महामंत्री संगठन विनायक राव सम्मेलन में आने वाले कार्यकर्ताओं का मार्ग दर्शन करेंगे।

पूर्वी क्षेत्र के तहत आने वाले चार प्रांत गोरक्ष, काशी, अवध और कानपुर-बुंदेलखंड से जुड़े 80 जिले और 800 प्रखंडों के करीब दो हजार कार्यकर्ता दो दिन के सम्मेलन में विहिप के शिविर में जुटेंगे। दो दिनों के बाद रणनीति के तहत सभी को पूर्वी उत्तर प्रदेश के गांव में योजनाबद्ध तरीके से भेज दिया जाएगा।

संतों की टीम भी बनेगी
धर्म संसद में पारित प्रस्ताव को जमीन पर उतारने के लिए संतों की भी टीम बनेगी। इन संतों का मुख्य कार्य अपने-अपने कार्य क्षेत्र से जुड़े श्रद्धालुओं में जोश भरना रहेगा। अध्यात्म, संस्कृति और राष्ट्रीयता की भावना जगाकर सभी को मंदिर निर्माण और उससे पहले केंद्र में मंदिर बनाने वाली सरकार को लाने के लिए प्रेरित करेंगे।
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