नहीं मिला भागने का मौका
यह सब इतनी तेजी से हुआ कि काम कर रहे 15 लोगों को भागने का मौका तक नहीं मिला। मेरे पिता हरिलाल भी आग की लपटों में घिर गए। मैं उन्हें बचाने के लिए बढ़ा, लेकिन उन तक पहुंच नहीं सका। आग में खुद घिरा तो जान बचाते बाहर भागा। पिता आंखों के सामने जिंदा जल गए...यह बताते हुए मुकेश की आंखें भर आईं। करीब 11.30 बजे भाई राकेश को फोन करके घटना बताई। एक दिन पहले गया था एक गाड़ी मालः मुकेश के मुताबिक एक दिन पहले ही फैक्टरी से एक गाड़ी पटाखे बाहर जा चुके थे। रविवार को अगर यह भी अंदर रखे होते तो शायद कोई नहीं बचता।
राजेंद्र आखिरी दिन आया था काम पर
85 फीसदी झुलसे बहरिया निवासी राजेंद्र (15) के पिता राजेश बताते हैं कि बेटा रविवार को पुराना हिसाब करने गया था। तभी, यह हादसा हो गया। एसआरएन के डॉ. मोहित जैन बताते हैं कि मुकेश व राजेंद्र की स्थिति गंभीर हैं। तीसरे, राजेश कुमार 60 फीसदी झुलसे हैं, जबकि कौसर अली एक निजी अस्पताल में भर्ती हैं।