रेखा सिंह जिला पंचायत अध्यक्ष बनी रहेंगी। उनके खिलाफ लाया गया अविश्वास प्रस्ताव गिर गया। बृहस्पतिवार को बुलाई गई बैठक में सिर्फ पांच सदस्य ही शामिल हुए। इस तरह से कोरम के अभाव में चर्चा नहीं हो पाई। पूरी प्रक्रिया के बाद अविश्वास प्रस्ताव गिरने का आदेश पंचायत भवन में चस्पा भी कर दिया गया।
रेखा सिंह के खिलाफ 2018 अक्तूबर में सांसद केशरी देवी ने अविश्वास प्रस्ताव लाया था। उस समय अविश्वास प्रस्ताव पारित भी हो गया था। इसके खिलाफ रेखा सिंह ने न्यायालय में याचिका दाखिल की थी। हाईकोर्ट के बाद मामला सुप्रीम कोर्ट में गया। न्यायालय के आदेश पर अविश्वास प्रस्ताव पर पुनर्मतदान के लिए बृहस्पतिवार को बैठक बुलाई गई।
अपर जिला न्यायाधीश बद्री विशाल पांडेय की अध्यक्षता में सुबह 11 बजे बैठक शुरू हुई। चूंकि कुल 92 जिला पंचायत सदस्य हैं। ऐसे में अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा और जरूरत पडने पर मतदान के लिए बैठक में न्यूनतम 47 सदस्यों की उपस्थिति अनिवार्य थी लेकिन निर्धारित समय दिन में एक बजे तक सिर्फ पांच सदस्य ही बैठक में शामिल हुए। इस तरह से कोरम के अभाव में अविश्वास गिर गया। इसके बाद की प्रक्रिया पूरी करके नतीजे की बाबत आदेश जारी कर दिया गया।
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दोनों पक्षों में पहले ही हो चुका था समझौता
रेखा सिंह और केशरी देवी पटेल के बीच दो दिन पहले ही समझौता हो गया था। उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के हस्तक्षेप के बाद भाजपा के वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में केशरी देवी के आवास पर दोनों पक्ष की बैठक हुई थी। उसमें तय हुआ था कि दोनों पक्ष के समर्थक सदस्य अविश्वास प्रस्ताव की बैठक में शामिल नहीं होंगे। इसके बाद ही शेष कार्यकाल तक के लिए रेखा सिंह का अध्यक्ष बने रहना तय हो गया था। अब बृहस्पतिवार को अविश्वास प्रस्ताव गिरने के बाद इस पर अंतिम मुहर भी लग गई।
मौजूद रहे रेखा के पति अशोक सिंह
दोनों पक्षों के बीच समझौता के बाद रेखा सिंह का अध्यक्ष बने रहना तय हो गया था। ऐसे में अविश्वास प्रस्ताव पर बैठक औपचारिकता रह गई थी। इसके बावजूद रेखा सिंह के प्रति अशोक सिंह पूरी प्रक्रिया के दौरान पंचायत भवन या आसपास मौजूद रहे। अविश्वास प्रस्ताव गिरने के बाद ही वह वहां से हटे।
जिला पंचायत भवन के आसपास तथा अध्यक्ष के आवास पर रेखा सिंह के समर्थकों का भी दिन भर जमावड़ा रहा। ज्यादातर जिला पंचायत सदस्य भी अध्यक्ष के आवास या आसपास के क्षेत्र में मौजूद रहे। ताकि, किसी तरह की चूक न होने पाए। बैठक और पुनर्मतदान को देखते हुए पंचायत भवन पर भारी फोर्स मौजूद रही। बैठक की प्रक्रिया के दौरान रास्ते का डायवर्जन भी किया गया था।